यदि हम मीठा सुनना चाहते हैं तो स्वयं को मीठाबोलने की आदत डालनी चाहिए: पुलक सागरजी

धर्म

यदि हम मीठा सुनना चाहते हैं तो स्वयं को मीठाबोलने की आदत डालनी चाहिए: पुलक सागरजी
| वरदा
आंतरी गांव में आचार्य पुलक सागरजी गुरुदेव का मंगल प्रवचन हुआ, जिसमें गुरुदेव ने जनसमुदायको अपनी भाषा व व्यवहार को मृदु संयमित और मधुर बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जैसा बोलता है, वैसा ही उसे सुनने को मिलता है। यदि हम मीठा सुनना चाहते हैं तो स्वयं को भी मीठा बोलने की आदत डालनी चाहिए।

 

गुरुदेव ने अपने प्रवचन में कहा कि वाणी मनुष्य का सबसे
प्रभावशाली आभूषण है। कठोर शब्द रिश्तों में दरार पैदा करते हैं, जबकि कोमल और मधुर वाणी घर-परिवार से लेकर समाज तक सौहार्द और शांति का वातावरण। निर्मित करती है। उन्होंने लोगों से। अपील की कि वे घर और बाहर,दोनों ही स्थानों पर संयमित एवं मर्यादित भाषा का प्रयोग करें व क्रोध, कटुता और अहंकार से दूर रहे।

 

प्रवचन के दौरान गुरुदेव ने। धर्म, आचरण और व्यवहार के
समन्वय पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि सच्चा धर्म वही है जो जीवन में उतरकर दूसरों के लिभी सुख का कारण बने। उन्होंने अहिंसा, क्षमा और विनम्रता को जीवन की मूल पूंजी बताते हुए इन्हें। आत्मसात करने का आह्वान किया।

 

प्रवचन उपरांत श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का वातावरण देखने कोमिला। आयोजकों व ग्रामवासियों ने
गुरुदेव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके सान्निध्य को अपने जीवन के लिए प्रेरणादायी बताया।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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