नगर के एवम जैन समाज के आधार स्तंभ श्री नेमीचंद रावका की पुण्य स्मृतिपर भाव भरी अभिव्यक्ति
व्यक्ति अपने नाम से नहीं अपने कार्य अपने व्यक्तित्व से जाना जाता है ऐसे ही व्यक्तित्व के धनी थे जो न सिर्फ नाम थे वह एक पर्याय थे ऐसे व्यक्तित्व थे श्री नेमीचंद रावका इन्हें सब भाया साहब कहकर पुकारा करते थे।
इनके अंदर नेतृत्व क्षमता का गुण था सबको साथ देकर चलने की कला थी साथ ही समाज की सुख दुख में अपना सर्वस्व समर्पित करते थे श्री दिगंबर जैन समाज रामगंजमंडी में कोई भी उनकी बात को नहीं डालता था उनके निर्णय को सर्वोपरि माना जाता था और वह ठोस निर्णय लेने के जाने जाते थे पूरी जैन समाज को एकता के सूत्र में बांधकर चलना इनकी कला कुशलता को दर्शाता था
आज इतने वर्ष उन्हें स्वर्गारोहण किए हो गए उनकी यादें उनकी स्मृति आज भी सभी के दिलों में बसी है। उनके जैसा व्यक्तित्व बिरले ही होते हैं आज भी उनकी कमी समाज में खलती है।
शत शत नमन




