अन्तर्मना उवाच(28 दिसंबर) गलत सोच, गलत दिशा और गलत अन्दाज.. इन्सान को गुमराह ही नहीं करता, बल्कि कहीं का नहीं छोड़ता..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
औरंगाबाद/गाजियाबाद
अंतर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्नसागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा। स्थिति ऐसी होती है जैसे धोबी का गधा – ना घर का ना घाट का। जीवन जीने के तरीके अच्छे हों तो आदमी झोपड़ी में भी महल का सुख भोग सकता है और नियत ठीक नहीं है तो महल भी झोपड़ी से बदत्तर है। जो लोग कम मिलने पर भी सदा हंसते मुस्कुराते रहते हैं, वे ही स्वर्ग जाने के अधिकारी हैं। इसलिए किसी ने कहा – सन्तोषी सदा सुखी, लोभी सदा दुखी।
जो गुरू और प्रभु को सदा धन्यवाद देते हैं, माता पिता के प्रति आभार प्रदर्शित करते हैं, जो भीतर से अमीरी का भाव लेकर जीते हैं, वे ही लोग आज सुखी हैं। जो सुख और दुःख में सदा धन्यवाद देते हैं, उनके प्रत्येक दिन दिव्यता से गुजरते हैं। ऐसे ही लोगों पर माता पिता, प्रभु और गुरू की कृपा एक साथ बरसती है।




ऐसे लोग ही धर्म को धारण कर धर्म का फल भोगते हैं, फिर वो लकीर के फकीर नहीं बनते, समस्याओं में नहीं समाधान में जीते हैं। भीतर से मौन, चेहरे की प्रसन्नता से परिलक्षित होता है, और फिर सुख, शान्ति, सन्तोष, सदभाव, प्रेम मैत्री, आनंद का जन्म होता है, और पापों की जमा पूंजी का खात्मा होता है,, फिर धर्म का प्रकाश फैलता है और भाग्य को सौभाग्य में बदलने की शक्ति पैदा होती है।
इसलिए जहाँ भी रहो, जिस कद पद पर रहो, समाज और देश की जरूरत बनकर रहो बोझ बनकर नहीं…!!!नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


