मुनि द्वय ने नोका विहार कर चम्बल नदी पार
चंबल की बीहड़
पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज व चन्द्रप्रभ सागर जी महाराज का मंगल विहार गुरु चरणों की ओर हो रहा मुनि द्वय ने चम्बल की बीहड़ में चम्बल नदी का अवलोकन करते हुए विहार किया सचमुच ऐसा दृश्य परीलक्षित होता दिख रहा जैसे साक्षात राम और लक्ष्मण को केवट नदी पार करा रहा हो
मुनि द्वय ने चम्बल के जंगलों को विहार कर अपनी आखियो से देखा आज उन जंगलों में विद्यासागर गुरुवर की जय जयकार का शोर सुनाई पढ रहा था। जहाँ कभी चीख चीत्कार बसती थी,जहां कभी बंदूक की गोलियों की आवाज़ पड़ती थी आज वहाँ जैन धर्म की ध्वज पताका लहरा रही थी। संयम के सारथियों की टोली निकल रही थी सब जगह विद्यागुरु की जय जयकार थी।
मानो लग रहा था अर्हम गुरु करुणा का सन्देश दे रहे हो यह वन मानो लग रहा था चंद्र गुरु गुरु गा रहे हो
सचमुच चम्बल बीहड़ो में इन महान सन्तो ने मंगल आगमन विहार कर अहिंसा शान्ती का सन्देश प्रेषित किया
क्या खूब गान किया है किसी ने
होली खेले मुनिराज अकेले वन में
काहे को रंग काहे की पिचकारी, ज्ञान गुलाल उड़ावे वन में,
होली खेले मुनिराज अकेले वन में
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी
