मनुष्य जीवन मिलना सौभाग्य की बात है यूं ही खाते पीते टाइम पास करते हैं मर जाना दुर्भाग्य की बात है प्रसन्न सागर महाराज 

धर्म

मनुष्य जीवन मिलना सौभाग्य की बात है यूं ही खाते पीते टाइम पास करते हैं मर जाना दुर्भाग्य की बात है प्रसन्न सागर महाराज 

औरंगाबाद//गाजियाबाद।  

 अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय पियूष सागरजी महाराज ससंघ तरुणसागरम तीर्थ पर विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि समय से मरना फिर लोगों के दिलों में जिन्दा रहना, ये सत्कर्म, सेवा, परोपकार की बात है..!

 

 

 

 

 

 

आज कल सबका व्यवहार हाथी के दांत जैसा हो गया है, खाने के और — दिखाने के कुछ और।दो प्रकार के लोग है इस दुनिया में — एक सरल मन वाले, दूसरे कुटिल बुद्धि वाले। सरल मन वाला व्यक्ति उस नदी की तरह पवित्र और पावन है, जो निश्छल मन से समुद्र से मिलने के लिए सतत प्रवाह मान हो रही है। जो बह रही है वो नदी है। वह अनेक संकटो से जूझते हुए, गिरते पड़ते बहे जा रही है। सिर्फ एक ही लक्ष्य है अनन्त में विलीन होना और उसका अपना कोई मकसद नहीं है। ऐसे ही सरल मन वाले लोग परमात्म तत्व को उपलब्ध हो जाते हैं। इसलिए निर्ग्रन्थ साधु को यानि दिगम्बर जैन साधु को बालक वत निर्विकारी की उपमा से अलंकृत किया है। दिगम्बर जैन साधु शिशु वत जीवन जीता है। कोई भी मजहब की माता बहिन आ जाये लेकिन दिगम्बर जैन साधु के मन में किंचित भी विषय, विकार, वासना का भाव नहीं आता। सभी माता बहिनों के प्रति सम दृष्टि रखता है।

 

 

 

 

एक गीत आपने सुना होगा

ओह रे – ताल मिले नदी के जल से, नदी मिले सागर से, सागर मिले कौन से जल से कोई जाने ना — ओह रे!

दूसरे हैं कुटिल बुद्धि के लोग* – जो हमेशा अपने किसी ना किसी उधेड़ बुन में मशगूल रहते हैं, इसकी टोपी उसके सर पे, उसकी टोपी इसके सिर पे जिनका काम होता है। आज देश और समाज में अच्छे लोग भी खोटा सिक्का चलाने की दौड़ में दम लगाकर दौड़ रहे हैं। इस शाश्वत सत्य को स्वीकार करो कि वो हमको हर पल देख रहा है।

 

हम खुद और खुदा की नजरों से कभी बच नहीं सकते…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *