हस्तिनापुर निर्मित कैलाश पर्वत अद्वितीय 

धर्म

हस्तिनापुर निर्मित कैलाश पर्वत अद्वितीय

कैलाश पर्वत हिमालय पर्वतमालाओं में स्थित है जो जैन धर्म के लिए एक पवित्र स्‍थल है। ऐसा माना जाता है कि इसी जगह जैन धर्म के पहले तीर्थकर भगवान ऋषभदेव ने मोक्ष की प्राप्ति की थी। वास्‍तव में, कैलाश पर्वत तक पहुचंना सभी साधारण श्रद्धालुओं के लिए संभव नहीं है, इसलिए जैन समुदाय द्वारा हस्तिनापुर में एक आसान विकल्‍प तैयार कर लिया। यहां भगवान ऋषभदेव के जन्‍मस्‍थान पर इसकी प्रतिकृति का निर्माण किया गया ताकि सभी श्रद्धालु यहां तक दर्शन के लिए आराम से पहुंच सके।

 

 

 

इसके अलावा, दूसरा पहलू यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण अक्षय तृतीया के दिन करवाया गया था, इसी दिन भगवान श्री आदिनाथ ने अपने 13 महीने पुराने उपवास को गन्‍ने का जूस पीकर तोड़ा था। 131 फीट की ऊंचाई वाले पर्वत पर 11.25 फीट ऊंची भगवान ऋषभदेव की पद्मासन मूर्ति स्‍थापित है। हस्तिनापुर में कैलाश पर्वत तीन चरणों में बना हुआ है। इसमें गोलाकर सीढियों पर 72 मंदिर स्थित है जो तीर्थंकरों के भूत, वर्तमान और भविष्‍य को दर्शाते है।

प्रत्‍येक गोलाकर सीढी, एक विशेष काल के 24 तीर्थांकरों को दर्शाती है। इमारत की अनूठी विशेषता इसकी नजा़कत, उत्‍कीर्ण फाटक, सजी हुई छत, खंभे और पैनल है।

आप सब भी एक बार यहां आकर दर्शन अवश्य करे

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

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