गुरुदेव प्रज्ञासागर महाराज ने दिया वात्सल्य व रात्रि भोजन त्याग का सूत्र, पदाधिकारियों का चयन हो, चुनाव नहीं जिनधर्म पदयात्रा रवाना, पहला पड़ाव बड़गांव में
कोटा | तपोभूमि प्रणेता पर्यावरण संरक्षक आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर महाराज के सान्निध्य में कोटा से अतिशय क्षेत्र जहाजपुर के लिए जिनधर्म प्रभावनापदयात्रा रविवार को शुरू हुई। जो रिद्धि-सिद्धि नगर सेरवाना होकर पहले दिन बड़गांव पहुंची।
पदयात्रा संयोजक मिथुन मित्तल ने बताया कि 19 दिसंबर तक यह पदयात्रा जहाजपुर पहुंचेगी। पदयात्रा के दौरान धर्मध्वज, रथ और वाद्य यंत्रों के साथ शोभायात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रावकों ने गुरुदेव का पाद प्रक्षालन, आरती की तथापुष्पवर्षा कर जयकारे लगाए। पुण्यर्जक परिवार बग्घी पर सवार रहा।
गुरूदेव ने गीतात्मक शैली में कहा- “मैं जा रहा हूं जाते-जाते क्या दूं, अपने प्यार को आशीर्वाद के रूप में दूं।” उन्होंने आचार्य वीरसेन के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्यक दृष्टि का प्रमाण मृत्यु के समय नमोकार मंत्र का स्मरण है। कबीर केदोहे “ढाई आखर प्रेम का…” के माध्यम से उन्होंने वात्सल्य और प्रेम को धर्म का मूल बताया। समाज को। संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों का चयन होना चाहिए चुनाव नहीं।
हरित संदेश: पर्यावरण संरक्षण का संकल्पः
चेयरमैन यतीश जैन खेड़ावाला ने बताया कि पदयात्रा के दौरान तय किया कि यात्रा मार्ग में पौधे लगाए जाएंगे। यह यात्रा हरित क्रांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी। महामंत्री नवीन दोराया ने बताया कि पदयात्रा में रात्रि भोजन निषेध है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







