गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज का सिलवानी में हुआ आगमन विधायक रामपाल सिंह सहित संपूर्ण नगर ने की उनकी मंगल अगवानी
रायसेन-
संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य गुणायतन एवं विद्या प्रमाण गुरुकुलम् तथा शंकासमाधान के प्रणेता राष्ट्रीय संत मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज का लगभग तीस साल बाद नगर आगमन हुआ तो संपूर्ण जैन समाज के साथ साथ पूरे नगरवासिओं ने उनका हृदय से अभिनंदन किया मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया इस अवसर पर स्थान स्थान पर मुनि श्री के स्वागत में बेनर एवं स्वागत गेट बने हुये थे तथा श्रद्धालुओं के द्वारा अपने अपने घरों पर रांगोली कर मुनिद्वय की मंगल आरती एवं पाद प्रक्षालन की होड़ लगी हुई थी इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु बेगमगंज, राहतगढ़, वम्होरी,खरगोन, जमुनिया,सियरमऊ, तड़ा केसली,सुल्तानगंज,गैरतगंज,गड़ी,बरेली,बाड़ी,सागर,भोपाल बरेली, टीकमगढ़, गाड़रवाड़ा साईखेड़ा सहित संपूर्ण सिलवानी नगर से जैन एवं जैनेत्तर बंधुओं ने गुरुदेव के चरणों में नमोस्तु निवेदित किया एवं उनके नगर तथा ग्राम को भी पवित्र करने की भावना प्रकट की।
इस अवसर पर स्थानीय विधायक रामपाल सिंह एवं नगर परिषद के पदाधिकारियों एवं समस्त जैन सामाजिक संगठनों के प्रमुखों, तथा नगर निरीक्षक पुलिस पूनम जी ने भी गुरु चरणों में नमोस्तु निवेदित कर शीतकालीन वाचना हेतु श्री फल अर्पित किया।इस अवसर मंच पर गुरुदेव के चरणों का पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य मनीष जैन अर्पित जैन सिंघई परिवार को मिला साथ ही गुरुदेव के करकमलों में शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य विजय कुमार एवं श्री मति ज्योति जैन बाड़ी बालों को मिला।
इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने कहा कि “भागीरथी की तपस्या से गंगा स्वर्ग से उतरी थी आप लोगों ने अपनी तपस्या से गंगा को उतारा है,और ये गंगा आज नहीं बल्कि आज से 20 वर्ष पहले पूज्य गुरुदेव को आप इसी तरह लेकर आये थे मुनि श्री ने कहा कि सिलवानी का कुछ नियोग है सिलवानी कई बार सजकर रह गई थी गुरुदेव आये और आजू बाजू से निकल गये आप लोगों को बड़ी हताशा रही लेकिन आपकी सारी हताशा को गुरुदेव ने दो बड़े प्रवास से दूर कर दिया मुनि श्री ने कहा कि आज इस समवसरण मंदिर तथा खड़े बाबा के मंदिर को देखकर मन आनंद से भर गया उन्होंने कहा कि यह आपके खड़े बाबा का चमत्कार और आप लोगों की प्रबल भावनाए ही है जो गाड़ी किसी और दिशा में जाने वाली थी वो गाड़ी सिलवानी की ओर मुड़ गई मुनि श्री ने कहा कि “सच्चाभक्त अपनी भावना तो व्यक्त करता है लेकिन कभी उसको अपना अधिकार नहीं मानता”
उन्होंने समस्त सिलवानी की जैन एवं जैनेत्तर समाज को आशीर्वाद देते हुये कहा कि जिस प्रकार से आप सभी ने उमंग उल्लास और उत्साह का परिचय दिया है इसने यह प्रमाणित कर दिया कि सिलवानी की समाज में देव गुरु के प्रति भक्ति कूट कूट कर भरी है,उन्होंने कहा कि यहा अखंड जैन समाज नहीं बल्कि अखंड सिलवानी नजर आ रही है आप लोगों ने जो भावना प्रकट की है वह अनुकरणीय है।
उन्होंने कहा कि अब हम आ गये है और आप लोग बुन्देलखण्डी कहावत को चरितार्थ करते हो उंगलियां पकड़ते पकड़ते कोंचा पकड़ते हो उन्होंने कहा कि “आना महत्वपूर्ण नहीं, महत्वपूर्ण यह है कि गुरुओं के सानिध्य से हमें क्या मिला” यदि हमारी चेतना जाग्रत है तो एक पल का सानिध्य भी हमारे जीवन में अमूलचूल परिवर्तन कर सकता है और चेतना सोई हुई है तो सारा जीवन साधु सन्निधि में रहने के उपरांत भी जहा के तहा रहता है,गुरु भक्ती प्रभु भक्ती मन में होंना चाहिये और आप लोगों में तो देख रहा हुं कि वह हिलोर मार रही है,लेकिन यह हिलोर एक पल की उमंग बनकर न रह जाये,
जीवन के परिवर्तन की तरंग बनना चाहिये” जो अंदर की कलुषता और कर्मषता को बहाकर ले जाए।”जोहमारे चित्त की धारा और चिंतन शैली को परिवर्तित कर चेतना को परिष्कृत करे और आत्मा को निखार दे” दो पक्तियों के साथ सभी को आशीर्वाद दिया “मातृ भावना मम रही,टूटे कर्म संयोग देव शास्त्र गुरुदेव का बना रहे शुभयोग”
इस अवसर पर मुनि श्री संघान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक गण एवं ब्रहम्चारी मंच पर विराजमान थे
कार्यक्रम का संचालन अभिषेक सिंघई ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312











