आचार्य विनिश्चय सागर महाराज संघ के साधुओं के साथ मंगल मिलन प्रत्येक प्राणी के अन्दर एक दूसरे के प्रति समर्पण की भावना होनी चाहिए- विनिश्चय सागर महाराज
टोंक – रविवार को गणाचार्य विराग सागर महाराज के शिष्य आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ससंघ का गाजे बाजे के साथ मंगल पदार्पण हुआ इसके साथ ही दिगम्बर जैन अमीरगंज नसियां मंदिर में विराजमान मुनि प्रज्ञान सागर महाराज एवं मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज का सवाई माधोपुर रोड पर मधुर मिलन हुआ।
जैन समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं विमल जौंला ने बताया कि आचार्य विनिश्चय सागर महाराज संध सोनवा रोड होते हुए सवाई माधोपुर रोड स्थित धर्मचंद अंशुल आंडरा के प्रतिष्ठान पहुंचे जहां आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज एवं प्रज्ञान सागर महाराज एवं प्रसिद्ध सागर महाराज संध का महामिलन हुआ।
एक दूसरे से गले मिलकर उनके शिष्यों ने आचार्य श्री के परिक्रमा लगाई जहां आचार्य श्री ने आशीर्वाद प्रदान किया। जैन समाज के प्रवक्ता पवन कंटान एवं विमल जौंला ने बताया कि आचार्य विनिश्चय सागर महाराज संध का मंगल प्रवेश जुलूस गाजे बाजे से रवाना होकर जैन नसियां पहुंचा जहां समाज के अध्यक्ष पदमचंद आड़रा, मंत्री महावीर देवली, नरेंद्र फागी, धर्मचंद दाखिया, लाल चंद फूलता, अंशुल, आड़रा, नंद लाल संघी, नेमीचंद बनेठा, कमल सर्राफ, नीटू छामुनिया, ओम ककोड़ मुकेश बरवास विकास अग्रवाल और समाज द्वारा अगुवानी की गई। उन्होंने बताया कि समस्त आचार संघ ने आदिनाथ भगवान के दर्शन करते हुए धर्म सभा प्रारंभ की गई। धर्म सभा से पूर्व विनोद जैन एवं बालिकाओं द्वारा मंगलाचरण किया गया। इसके बाद राजस्थान जैन सभा जयपुर एवं निवाई के विनोद जैन कोटखावदा, चेतन निमोडि़या, अशोक बाकलीवाल, विमल पाटनी, पुलकित जैन, गजानंद काला, ने आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के दीक्षा दिवस पदमपुरा में मनाने को लेकर बेनर पोस्टर का विमोचन किया गया। इस दौरान निवाई जयपुर पदमपुरा शिवाड़ एवं टोंक जैन समाज ने शीतकालीन प्रवास हेतु श्री फल भेंटकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया। 

आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज संध का टोंक से मंगल विहार करते हुए रात्रि विश्राम नेशनल हाईवे स्थित सोहेला क्षेत्र में हुआ। इस मौके पर समाज के अंकुर पाटनी, चेतन जैन, पप्पू नमक, अनिल सर्राफ, मनीष फागी, कुन्दन आंडरा, ज्ञानचंद संघी, जयदीप बड़जात्या, भागलचंद ऊं वाले आदि लोग मौजूद थे 


आचार्य श्री ने सम्बोधित किया
इस अवसर पर आचार्य विनिश्चय सागर महाराज ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंदर समर्पण की भावना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संसार एवं मोक्ष का सम्पूर्ण व्यवहार विश्वास की आधारशिला पर अवस्थित है। सदैव सज्जनों की संगति में रहना चाहिए।
अतः आप व्यवहारिकता में सज्जन पुरुषों की संगति करना और सही पूछा जाए तो परमात्मा से दोस्ती करना उसे अपना मित्र बनाना यदि परमात्मा को मित्र बना लोगे तो एक दिन तुम भी परमात्मा बन जाओगे। उन्होंने कहा कि मानव का शत्रु क्रोध है। यदि किसी को बात बात पर क्रोध आता है तो यह समझ लेना चाहिए कि उसने पग पग पर अपने शत्रुओं को तैयार कर लिया है। उन्होंने कहा कि क्रोध के अलावा दूसरा कोई पाप नहीं है। क्रोध के आवेश में आकर प्राणी अपने और पराए के प्राणों का धात करने के लिए तैयार हो जाता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





