दीक्षा के बाद निर्यापक मुनि श्री वीर सागर जी महाराज का नेमावर सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र में प्रथम बार आगमन हुआ

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दीक्षा के बाद निर्यापक मुनि श्री वीर सागर जी महाराज का नेमावर सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र में प्रथम बार आगमन हुआ

नेमावर
परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के परम शिष्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 वीर सागर महाराज का सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र पर दीक्षा के उपरांत प्रथम बार आगमन हुआ।

 

 

पूज्य मुनि श्री की अगवानी बहुत ही अभूतपूर्व थी नगर वासी एवं क्षेत्र कमेटी काफी उत्साहित थी। साथ ही आसपास के जिसमें हाटपिपलिया, खातेगांव,हरदा, इंदौर , बानापुरा आदि क्षेत्रों के लोग भी अगवानी हेतु पहुंचे। जय जय कारों के बीच महाराज श्री की ऐतिहासिक अगवानी की गई।

पूज्य महाराज श्री का नेमावर से गहरा नाता
परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 वीर सागर महाराज का इस क्षेत्र से काफी गहरा नाता रहा है। इसकी मुख्यता इसलिए है कि दीक्षा के पूर्व सन 2002 में वह आचार्य श्री के सानिध्य में ब्रह्मचर्य अवस्था में चातुर्मास के दौरान नेमावर में रहे थे।

पूज्य महाराज श्री ने मंदिर परिसर में पहुंचकर उन्होंने अपनी पुरानी स्मृतियों को साझा किया और भव्य मंदिर देखकर बहुत अभिभूत हुए।

 

 

 

क्षेत्र के विकास को लेकर मुनिश्री ने कहा की आचार्य श्री के द्वारा वृत्ति आश्रम की शुरुआत भी नेमावर से ही की, और क्षुल्लक दीक्षाओं की शुरुआत भी। मुनिश्री ने कहा कि नेमावर आचार्य श्री की प्रिय स्थान में से एक रही है। उन्होंने इस क्षेत्र को खोज के निकाला और जब यहां आए थे तब यहां उन्होंने शून्य से शुरुआत की और आज यहां पर गगनचुंबी जिनालय खड़ा है। साथ ही उन्होंने कमेटी को भी आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए मंदिर का संरक्षण रखने की बात कही।
मुनि श्री के पद प्रक्षालन का सौभाग्य वृत्ति आश्रम के सभी ब्रह्मचारी भैयाजी को और शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य सभी वृत्ति बहनों को मिला।

पूज्य महाराज श्री ने करोड़ों रुपए का पैकेज को सन्यास एवं मुनि जीवन को अपना लक्ष्य माना
पूज्य वीर सागर महाराज ने संसार की मोह माया को नश्वर मन एवं इससे मोह नहीं रखा और विरक्ति भाव लेकर मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ते हुए मुनि जीवन को ही अपना लक्ष्य माना। उन्होंने इसके लिए करोड़ों रुपए का पैकेज भी ठुकरा दिया। जो अपने आप में एक अलौकिक उदाहरण है। नागपुर नगर के नगर गौरव महाराज श्री बीटेक केमिकल इंजीनियर, एम बी ए फाइनेंस, के साथ सी.एफ. ए. पीजीडीसीए की शिक्षा ग्रहण की है। शिक्षा के उच्च स्तर होने के बावजूद भी इन्होंने संसार से मोह नहीं रखा। इन्होंने गरहस्थ जीवन ने बिरला वी एक्स एल लिमिटेड पोरबंदर गुजरात में सर्विस करने के साथ ही सोने चांदी की कंपनी में पार्टनर होने के साथ-साथ एडवाइजर के रूप में भी कार्य किया । सब कुछ होने के बाद भी मोक्ष मार्ग को ही इन्होंने सर्वोत्तम माना। जो सभी के लिए प्रेरणा दायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। आपको बता दें मुनि श्री का विहार पुणे चातुर्मास के उपरांत सिद्ध क्षेत्र कुंडलपुर की ओर चल रहा है। जहां 16 अप्रैल को आचार्य पद प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यता के साथ संपन्न होने जा रहा है।

अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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