जब योग्यता देख ली तो योग्यता को छिपाना नहीं चाहिए-मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज निर्यापकाचार्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज के कर कमलों से हुई जैनेश्वरी दीक्षाए
थूबोनजी –
-अंचल के सबसे बड़े तीर्थ अतिशय क्षेत्र दर्शनोंदय तीर्थ थूबोनजी में परम पूज्य आध्यात्मिक संत निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के कर कमलों से 14 भव्य जैनेश्वरी ऐलक दीक्षाए प्रदान की गई दर्शनोदय तीर्थ थूबोनजी के एक हजार साल के इतिहास में पहली बार एक मंच पर एकसाथ चौदह दीक्षाए मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के कर कमलों से हुई इसमें संघस्थ क्षुल्लक श्री विदेह सागर महाराज क्षुल्लक श्री विदेह सागर महाराज की भी जैनेश्वरी ऐलक दीक्षा हुई
आचार्य श्री ने इस श्रमण संस्कृति को जग में ऊंचाईयों तक पहुंचाया निर्यापकचार्य
विशाल जन सैलाब को संबोधित करते हुए निर्यापकाचार्य श्री सुधा सागरजी महाराज ने कहा कि आचार्य कुंद कुंद भगवान के बाद इस श्रमण संस्कृति को आचार्य भगवंत गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज ने इस को ऊंचाई दी सन 1996 में पांच ब्रह्मचारी जयपुर भेजें थे एकदम नये फैस ब्रह्मचारी भेजें लेकिन उस समय हमारी भावना थी कि आचार्य श्री दीक्षा दे फिर आचार्य श्री ने कुंडलपुर में कहा संघ निर्माण की दिशा में काम करें उन्होंने कहा कि मेरा सोचना व्यर्थ है क्या फिर एक बार सामायिक के बाद कहा। गुरु ने जब योग्यता देख ली तो योग्यता को छिपाना भी अपराध है जब आदेश दिया है इसका पालन करो नये ब्रह्मचारी को तैयार करो
उन्होंने कहा कि आज मैं गुरु की आज्ञा के पालन करने के लिए संसार में क्या आकाश में भी छेद देख कर सकता हूं गुरु की भावना रखने के लिए पूज्य गुरुदेव की आज्ञा के कारण कर रहे हैं तीन लिंग ही दर्शनीय है चौथा लिंग का उल्लेख नहीं है मोक्ष मार्ग में ये धीरे धीरे बढ़ाने वाले हैं आज तीज़ है और हम इन्हें मुक्ति का बीज दे रहे हैं
क्षुल्लक श्री वरिष्ठ सागर जी ने किया दीक्षा प्रदान करने का किया निवेदन
दीक्षा लेने के पूर्व क्षुल्लकश्री 105 वरिष्ठ सागर जी महाराज ने कहा कि अनंत संसार बंधन से मुक्त कराने क्रोध आदि कषायो से मुक्ति को हम प्राप्त हो इस हेतु जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करें।क्षुल्लक विदेह सागर जी महाराज ने कहा कि सृष्टि के जितने भी जीव है वे पुज्य गुरुवर आपको चरणों में जीवन समर्पित कर दिया है।
मोनू भया ने कहा कि संसार में जीव अनंत है सब लोग सुख की प्राप्ति के लिए लगे तो है लेकिन सही दिशा में प्रयास नहीं कर पा रहे सही दिशा में हम आगे बढे इसलिए आपसे निवेदन हमें दीक्षा प्रदान करें
इस कलि काल में बिना गुरु के कल्याण नहीं होगा अक्षय भया
अक्षय भइया ने कहा कि इस कलि काल में बगैर गुरु के बिना कल्याण नहीं हो सकता मुझे दीक्षा प्रदान करें।

अतिशय भया ने कहा कि जब में दूसरी कक्षा पड़ता था तब मैं मां के साथ टी वी पर प्रवचन देखा करता था तब से ही मुझे इन जैसा बनना है वह सपना आज पूरा हो रहा है।
इस दौरान विवेक भया ने कहा कि आपके चरणों में रहकर कोई ग़लती हुई हो तो क्षमा करें इसके बाद सभी ब्रह्मचारी भइयाजीयो ने अपनी भावनाएं व्यक्त की।


नव दीक्षार्थीयो के नामों की घोषणा की निर्यापकाचार्य ने
दीक्षा के संस्कार देने के बाद मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने नव दीक्षार्थी के नामों की घोषणा की प्रथम ऐलक 105श्री वरिष्ठ सागर जी महाराज ऐलक श्री 105विदेह सागर जी महाराज नये ब्रह्मचारी मोनू भइया का नाम ऐलक105 सुज्ञान सागर जी महाराज सोनू भया का नाम ऐलक 105सुयोग सागर जी महाराज अक्षय जैन अभाना मध्य प्रदेश का नाम ऐलक 105 शुमेध सागर जी महाराज
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अतिशय जैन सागर मध्य प्रदेश B.A, M.A, शास्त्री ऐलक 105सुबोध सागर जी महाराज .विवेक जैन गंजबासौदा Μ.Β.Α, Μ.Α ऐलक 105सुनय सागर जी महाराज .
कमलेश जैन ,MA,BED केकड़ी राजस्थान ऐलक 105सुधर्म सागर जीमहाराज
.आशु जबलपुर मध्य प्रदेश
BA, M.COM ऐलक 105सुविवेक सागर जी महाराज
अंकुर जैन धुबडी असम
सिविल इंजीनियर ऐलक 105सुशांत सागर जी महाराज
MA, BED,MED CA
संयम जैन अहमदाबाद गुजरात B.TEC ऐलक 105सुधर्म सागर जी महाराज
अंकित जैन बांदरी सागर
मध्य प्रदेश MBBS ऐलक 105 सुयश सागर जी महाराज .राहुल जैन मालपुरा राजस्थान B.A ऐलक 105 सुचेतन सागर जी महाराज “सुयश जैन राहतगढ़ मध्य प्रदेशBsC ऐलक 105 सुगुण सागर जी महाराज नाम दिया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312










