मुनि श्री सुधा सागर महाराज के सानिध्य में निकली 3 किलोमीटर की निकाली पदयात्रा ने रचा इतिहास श्रीश जैन ललितपुर
अशोकनगर से दर्शनोदय की ऐतिहासिक पद यात्रा को देख दुनियां इस बात को भली भांति समझ गयी हैं कि निर्यापक श्रेष्ठ को उनके ही भक्तो ने जगत पूज्य बनाया हैं अशोकनगर के रहवासियों ने जब मंशा जाहिर की कि हम पदयात्री बनकर आपके साथ दर्शनोदय तक चलना चाहतें हैं तब मुनि पुंगव ने आशीर्वाद दिया और कहा कि हम तभी चलेंगे जब सिर्फ अशोकनगर ही नही बल्कि पूरे भारत के लोग आए और पदयात्रा में शामिल हो
बस फिर क्या था गुरु के कहने की देर हुई और भक्तो में हौड़ लग गयी कि हम भी पदयात्रा में जाएंगे – भक्त ही अकेले पदयात्रा में नही आये बल्कि अपने गांव शहर में प्रसिद्ध जैन धर्म की महिमा को बढ़ाने वाली सुंदर सुंदर झांकिया भी बना कर लाएं— एक और आश्चर्य इस बात का हैं कि जितनी भी झांकिया और दिव्यघोष आई उनके निर्माण में भले ही हजारों रुपया खर्च हुए लेकिन उन्होंने दर्शनोदय कमेटी से किसी भी तरह की कोई मांग नही रखी ,,

तीन किलोमीटर लंबी यात्रा ने स्वर्णिम इतिहास लिख दिया हैं यही वो इतिहास हैं जो आने वाले समय में युवाओं को धर्म के प्रति जागरूक करता रहेंगा, आज चौथे चरण की यात्रा पूर्ण कर पदयात्री दर्शनोदय में पहुँचे तब नजारा देखने लायक था भगवान आदिनाथ की मुखमुद्रा अत्यधिक मनमोहक लग रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वे कहना चाह रहें थें कि अभी तक सिर्फ निर्देश आते थे अब तुम आ गए हो तो कुछ ऐसा करना कि धर्म की प्रभावना कई गुना बढ़ जाए और दुनियां भर के भक्तों का भला हो जाए,,,जैसा कि आप सभी को ज्ञात हैं कि दर्शनोदय को अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र का दर्जा प्राप्त हैं और जगत पूज्य के आतें ही वास्तविक अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र दिखाई देने लगा हैं


अभी अभी 1008 कलशों से शुरू हुए अभिषेक के बाद बड़े बाबा के सामने खड़े जगत पूज्य को देख बड़े बाबा और छोटे बाबा की याद ताजा हो आई और भक्तों ने गगनभेदी जयकारों से पूरा आकाश गुंजायमान कर दिया- सुधासागर गुरु का आशीर्वाद बना रहें इसी मंगल भावना के साथ
#श्रीश ललितपुर


