धर्म तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव में आचार्य श्री गुप्तिनंदी गुरुदेव द्वारा रचित नवग्रह शांतिनाथ विधान संपन्न
औरंगाबाद
पावन कचनेर तीर्थ के निकट बने धर्मतीर्थ पर पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत आचार्य श्री गुप्तिनंदी गुरुदेव द्वारा रचित नवग्रह शांतिनाथ विधान संपन्न हुआ। इस पंचकल्याणक महोत्सव के दूसरे दिन महाराष्ट्र सरकार के जिला पालक मंत्री संदीपान भूमरे पधारे। उन्होंने धर्म तीर्थ पर आकर वहा का निरीक्षण किया उन्होंने कहा एक भव्य तीर्थ स्थल का निर्माण किया गया है इसके लिए मुझे सड़क बिजली पानी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा आगे भी विकास कार्य होते रहेंगे और यहां हो रही कमियां भी दूर होगी। उन्होंने अपने शब्दों में आगे बोलते हुए कहा कि राजनीति के साथ-साथ सेवा कार्य और परोपकार करने से भी सफलता मिलती है। उन्होंने कहा कि इस तीर्थ क्षेत्र के बनने से कचनेर क्षेत्र का भी कायाकल्प हो गया है।
इस अवसर पर मंत्री महोदय का स्वागत पंचकल्याणक समिति अध्यक्ष संजय पापड़ीवाल, महामंत्री चंद्रशेखर पाटनी, गौरवअध्यक्ष प्रकाश अजमेरा, सुनील काला, राजेंद्र पाटनी, अरुण पाटनी, एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा मंत्री महोदय का भावभीना अभिनंदन किया गया।
मंत्री महोदय सेवा भावना से कार्य कर रहे हैं देवनंदी महाराज

इस अवसर पर आचार्य श्री आचार्य श्री गुप्तीनंदी गुरुदेव ने कहा, बहुत कम समय में जब से यहां शिलान्यास हुआ है धर्म स्थल के रूप में एक धार्मिक स्वर्ग का निर्माण हुआ है। आचार्य देवनदी जी गुरुदेव ने पालक मंत्री जी जमकर तारीख की उन्होंने कहा कि वह भगवान महावीर के उपदेश को आगे बढ़ा रहे हैं साथ ही उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने के लिए भाईचारा और समर्पण होना चाहिए पालक मंत्री इसी भावना से सेवा कार्य कर रहे हैं उन्होंने आशीर्वाद दिया की भविष्य में यह केंद्र में मंत्री पद संभालेंगे। इस अवसर पर सरपंच नरहर अगलावे सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। मंच पर अनेक साधु संत साध्वी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

पुनीत बेला में आचार्य श्री गुप्तिनंदी गुरुदेव द्वारा रचित नवग्रह शांति विधान सानंद संपन्न हुआ इस अवसर पर पूज्य आचार्य गुप्तीनंदी गुरुदेव ने मार्गदर्शन करते हुए कहा कि गणाधिपति गणधराचार्य कुंथुसागर जी महाराज एवं आचार्य कनकनंदी जी इन गुरुदेव ने नवग्रह शांति के महत्व को विस्तार से बताया है। नव ग्रहों की अनुकूलता जीवन को सफल बनाती है। उन्होंने कहा अच्छा स्वास्थ्य धन और मन की शांति फायदेमंद होती है।
सूर्य श्री पद्मप्रभु भगवान चंद्रमा चंद्रप्रभु भगवान,मंगल श्री राजपूत जी भगवान, बुध विमलनाथ आदि आठ भगवान, बृहस्पति श्री वृषभादि आठ भगवान, शुक्र श्री पुष्पदंतनाथ भगवान, शनि श्री मुनीसुव्रतनाथ भगवान, राहु श्री नेमीनाथ भगवान केतु श्री मल्लीनाथ भगवान और श्री पार्श्वनाथ भगवान तीर्थंकर भगवान के 68 अर्ध समर्पित किए गए। साथ ही नवग्रहरिष्ट निवारक समुच्चय पूजन की गई। इसके उपरांत समस्त इंद्र एवं इंद्राणी द्वारा श्री नवग्रह शांति स्त्रोत्र का पाठ किया गया।
भव्य मंडप, प्रवेश द्वार आकर्षण का केंद्र

धर्म तीर्थ पर 24 फरवरी तक प्रतिदिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होंगे इसके मध्य क्षेत्र में एक भव्य मंडप मनाया गया है जो जर्मन हैंगर की शैली में बनाया गया जो बहुत विशाल है वह सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसे पांडाल वह मंडप की खास बात यह है कि इसमें कोई खंभा नहीं है और कोई भी बिना किसी बाधा के पूरे कार्यक्रम में भाग ले सकता है। मिली जानकारी अनुसार मुख्य मंडप 40 मीटर चौड़ा और 75 मीटर लंबा है 40 फुट लंबा और 17 फुट चौड़ा चबूतरा बनाया गया है। नहीं मंच के पीछे एक सुंदर शाही महल की प्रतिकृति बनाई गई है जो सभी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है इंदौर के मुन्नालाल अग्रवाल, मंडप प्रमुख प्रीतम पोरवाल व उनके 50 साथियों ने इस मंडप को बनाने में 8 दिन तक दिन और रात काम किया है। इस मंडप का मुख्य द्वार भव्य और आकर्षक है कोलकाता के उदय शंकर राय द्वारा 100 फीट लंबा 41 ऊंचे इस प्रवेश द्वार को फीट की ऊंचाई के साथ डिजाइन किया गया है।
विस्तृत जानकारी देते हुए प्रचार समन्वयक नरेंद्र अजमेरा, पीयूष कासलीवाल ने बताया कि इसमें राजस्थान के रणकपुर के मंदिर की प्रतिकृति बनाने मैं सफलता हासिल की है। इसके साथ ही नवग्रह छवियों को चित्रित करने के लिए इसमें नौ गुंबद हैं। राय के मार्गदर्शन में बने इस प्रवेश द्वार को बनाने के लिए 10 कारीगरों ने पिछले 5 दिनों में हर दिन 15 घंटे काम किया है।
श्रद्धालु यहां की व्यवस्थाओं से अभिभूत
इस पावन तीर्थ स्थल पर आयोजन में पूरे भारतवर्ष से भक्तजन पधार रहे हैं वहीं मुख्य मंडप के पास श्रद्धालुओं की करने की उच्चतम व्यवस्था की गई है।
यहां की व्यवस्था से आने वाले श्रद्धालु बहुत अभिभूत हैं। अस्थाई व्यवस्था पर अगर नजर डालें तो 300 कमरों में पंद्रह सौ लोगों के ठहरने की बेहतरीन व्यवस्था बनाई गई है इसके अलावा पांच बड़े निवास होल हैं।

कुल 100 लोग बैठ सकते हैं। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए अलग से आवास व्यवस्था की गई है। अतिरिक्त व्यवस्था कचनेर स्थित भव्य धर्मशाला में भी की गई है। जिसके लिए उन्हें वाहनों से धर्म तीर्थ तक आने जाने की व्यवस्था भी प्रदान की गई है। इसे सर्वोत्तम व्यवस्था को डॉ प्रकाशचंद पापड़ीवाल, संजय कासलीवाल, गिरीश गंगवाल, सुरेश पहाड़े, ललित पापड़ीवाल, प्रीतम पाटनी, भूषण गंगवाल, वह साथी देख रहे हैं।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंज मंडी की रिपोर्ट
