आर्यिका अंकलकमति माताजी ने भगवान महावीर के कृतित्व पर प्रकाश डाला
साग़र
आर्यिका 105 अंकलंकमति माताजी के सानिध्य में भगवान महावीर का निर्वाणकल्याण महोत्सव मनाया गया इस अवसर पर उन्होनें भगवान महावीर के कृतित्व पर प्रकाश डाला
उन्होनें कहा कि प्रभु महावीर को 12 वर्षों की कठिन तपस्या के बाद उन्हें केवलज्ञान प्राप्त हुआ।जिसके पश्चात् उन्होंने समवशरण में ज्ञान प्रसारित किया। 72 वर्ष कीआयु में उन्हें पावापुरी से मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस दौरान महावीर स्वामीके कई अनुयायी बने जिसमें उससमय के प्रमुख राजा बिम्बिसार,कुणिक और चेटक भी शामिल थे।
संकलित जानकारी
अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमडी
