तीर्थंकर कुल का मनुष्य जीवन कीमती रत्न है इसकी कर्म रूपी चोरों से सुरक्षा करना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

तीर्थंकर कुल का मनुष्य जीवन कीमती रत्न है इसकी कर्म रूपी चोरों से सुरक्षा करना चाहिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

टोंक

आज श्री आदिनाथ जिनालय में आप श्री शांतिनाथ मंडल विधान की पूजन भक्ति भाव से कर रहे हैं। पंचकल्याणक की धार्मिक क्रियाएं भी उत्साह से करना चाहिए कुछ समय पूर्व श्री पारसनाथ भगवान की नूतन प्रतिमा नगर में आई है अभी उनमें गुणों का आरोपण नहीं किया गया है पंच कल्याणक के दौरान सूरी मंत्र द्वारा उस प्रतिमा को प्रतिष्ठित किया जावेगा ।भगवान के प्रतिदिन दर्शन, अभिषेक ,पूजन ,ध्यान, स्वाध्याय निराकुलता पूर्वक करना चाहिए। मनुष्य जीवन बहुत ही दुर्लभ है आपको वीतरागी  तीर्थंकर भगवान का कुल प्राप्त हुआ है। यह सौभाग्य के पल है, जीवन में प्रतिदिन उम्र बढ़ने के साथ आयु भी कम होती जाती है ,यह मंगल देशना पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने श्री आदिनाथ जिनालय नसिया में शांतिनाथ विधान के पूजन के समय प्रकट की। राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने प्रवचन में आगे बताया कि मानव जन्म बहुत ही कठिनाई से संचित पुण्य से प्राप्त होता है दिन प्रतिदिन आपकी उम्र कम होती जा रही है आयु बढ़ने के साथ जीवन भी प्रतिपल कम होता जाता है ।अब क्या करना है ,इसका चिंतनभगवान को देखकर करना चाहिए कि भगवान ने जो प्राप्त किया है वह आप कैसे प्राप्त करसकते हैं भगवान कीभक्ति करने से कर्मों कीनिर्जरा होती है ।कर्मों का हर पल भय, डर होना चाहिए नवीन कर्मों का आश्रव कैसे रुकेगा , धार्मिक विधान कार्य करने से कर्मों का क्षय होता है।हर व्यक्ति भगवान से सुख की कामना करता है धर्म कार्य करने से सुख मिलता है भगवान की चरण शरण से ही मुक्ति मिलती है इसलिए जीवन में पुण्य अर्जित बढ़ाने का कार्य करना चाहिए ।भगवान के शरण में चिंतन करें।श्री पारसनाथ भगवान का पंच कल्याणक होना है पारसनाथ भगवान और कमथ पूर्व पर्याय में सगे भाई थे पर कमथ ने जीव ने 10 भवों तक पारसनाथ भगवान के जीव पर उपसर्ग किए किंतु पारसनाथ भगवान के जीव ने सभी उपसर्गों को समता भाव से सहन किया ।जिस प्रकार कीमती रत्न को आप तिजोरी में सुरक्षित करते हैं उसी प्रकार मनुष्य जीवन भी कीमती रत्न है इसकी भी सुरक्षा कर्मों से करना चाहिए। भगवान की शरण का लाभ लेना चाहिए। रमेश काला के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के संघ सानिध्य में आगामी 7 नवंबर से 12 नवंबर तक पंचकल्याणक प्रतिष्ठा पुराने टोंक के नूतन जिनालय के लिए होगी।आज पंच कल्याणक प्रतिष्ठा समिति के सभी पात्रों और समाज के पदाधिकारियों महिला पुरुषों ने श्री शांतिनाथ मंडल विधान की पूजन की सभी ने आचार्य श्री की पूजन भी की। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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