अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में 48 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ

धर्म

अवधपुरी के विद्याप्रमाण गुरुकुलम् में 48 मंडलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ

भोपाल

संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज एवं मुनि श्री संधान सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में श्री 1008 श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान (संस्कृत बीजाक्षरों युक्त) का शुभारंभ हो गया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः6 बजे मुनिसंघ के सान्निध्य में घट यात्रा के साथ हुई, सभी महिलाएं इंद्राणियो के रूप में सिर पर चांदी के तथा अन्य धातु के मंगलकलश धारण कर चल रही थी वही पुरुषवर्ग भी विशेष वस्त्रों से सुसज्जित होकर धर्मध्वजा को धारण कर चल रहे थे समूचे अवधपुरी का वातावरण सूर्य की प्रथम रश्मि से ही धर्ममय हो गया,घटयात्रा वापिस आयोजन स्थल पर वापिस आई एवं कत्थावाला परिवार कानपुर के द्वारा ध्वजारोहण संपन्न हुआ तत्पश्चात मंडप उदघाटन एवं सकली करण की क्रियायें संपन्न हुई।

 

 

 

 

 

विद्याप्रमाण गुरुकुलम् जिनालय से जब चातुर्मास चकृवर्ती तथा चातुर्मास के नवरत्न एवं मंडलों के पुण्यार्जक अपने सिर पर श्री जी को विराजमान कर पांडाल की ओर आगे बड़ रहे थे तो उनके साथ चल रहे श्रावक प्रभु की जयजयकार कर रहे थे एवं इंद्राणियां मंगलकलश धारण कर मंगल गीत गाते हुये आगे बढ़ रही थी अवधपुरी का यह दृश्य किसी स्वर्गलोक जैसा शोभायमान हो रहा था विधानाचार्य एवं संगीतकार की स्वरलहरियों के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई पांडुक शिला पर अभिषेक विधी को संपन्न कराया गया एवं मुनि श्री के मुखारविंद से विश्व में शांति स्थापित हो कि मंगलभावना से शांतिधारा संपन्न हुई।

 

 

इस अवसर पर मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की महिमा को सुनाते हुये कहा यह सर्व विधानों में श्रैष्ठतम सभी प्रकार की विघ्नबाधा को दूर करने वाला तथा विशुद्धि को बढ़ाने वाला सभी सिद्ध परमात्माओं की वृहद स्तुति करने वाला विधान है, उन्होंने कहा कि,यंहा पर श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान की स्थापना मूल बीजाक्षरों से युक्त मंत्र एवं “अ” से लेकर “ह” तक सभी अक्षरों के साथ की गई है,जो इस बात का प्रतीक है,लोक में जितने भी मंत्र है उन सभी मंत्रों के बीज यंहा इस मंडल में मौजूद है,उन सभी मंत्रों की आराधना इनआठ दिनों में यंहा पर संपन्न होगी उन्होंने कहा कि विश्व की वह समस्त शक्तियाँ यहा पर प्रतिष्ठापित होंगी,मुनि श्री ने कहा विधान में प्रतिदिन पूजन, जाप्यानुष्ठान,और हवन तीनों होते है इसमें से यदि कोई एक भी कम है तो वह विधान नहीं केवल पूजन कहलाऐगी उन्होंने कहा कि आप लोग जितनी अधिक भाव विशुद्धि रखेंगे उतनी ही आपकी अंतरंग की शुद्धि होगी जो कि कर्म निर्जरा का साक्षात कारण बनेगा तथा उनके जीवन में धर्मानुराग बढ़ने से परिवर्तन आएगा एवं दुःख दारिद्र नष्ट होकर सभी प्रकार की विघ्न बाधायें नष्ट होंगी।

 

 

 

मुनि श्री ने कहा कि अब यह मात्र साधारण पांडाल नहीं है, यह एक समवसरण का रुप ले चुका है,48 जिनबिंब विराजमान है, यहा की ऊर्जा अनंत गुणा बढ़ चुकी है,तथा जैसे जैसे प्रभु भक्ती आगे बढ़ेगी यंहां की ऊर्जा भी अनंतगुणा बढ़ती चली जाएगी आप सभी साधारण मनुष्य नहीं बल्कि स्थापना नियोग से सौधर्म इंद्र एवं इंद्राणियो के रुप में है,आपके साथ चतुर निकाय के देव भी प्रभु की भक्ती कर रहे है,आप अपनी शुद्धी का ध्यान रखते हुये विशुद्धि को बढ़ाईये।

 

 

 

 

उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को अनुशासन एवं शुद्धि का विशेष निर्देश देते हुये कहा पांडाल में किसी भी प्रकार की अशुद्धि नहीं रहना चाहिये यदि यंहा पर अशुद्धि होगी तो वह संकलेश का कारण बनेगा और उससे उल्टा कर्म बंध होगा,इसलिये सभी लोग भाव विशुद्धि के साथ अंतरंग की शुद्धी को बनाये रखें।इस अवसर पर समस्त क्षुल्लक मंचासीन रहे।

 

 

 

कार्यक्रम का संचालन विधानाचार्य अभय भैया एवं सहायक अमित

वास्तु इंदोर ने किया। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन प्रातः6 बजे मंगलाष्टक के साथ भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा प्रारंभ होगी। तत्पश्चात महापूजा एवं मध्य में 8:30 बजे 9:20 तक मुनि श्री का मांगलिक उदवोधन एवं विधान प्रारंभ होगा तथा

प्रतिदिन11 बजे तक समापन होगा। सांयकाल 6:20 से शंकासमाधान एवं 7:30 से मंगलआरती होगी। विद्याप्रमाण गुरुकुलम् एवं विद्यासागर प्रवंधकीय संस्थान के सभी पदाधिकारियों ने भोपाल जैन समाज से सभी धार्मिक क्रियाओं में भाग लेंने की अपील की है।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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