आप लोग बहुत भाग्यशाली है, आप लोगों को मनुष्य जन्म मिला वह भी ऐसे वैसे कुल में नहीं,जहा पर पीढ़ियों से अहिंसा के संस्कार है, जिसके डी.एन.ए में अहिंसा है”प्रमाण सागर महाराज
सिलवानी
आप लोग बहुत भाग्यशाली है, आप लोगों को मनुष्य जन्म मिला वह भी ऐसे वैसे कुल में नहीं,जंहा पर पीढ़ियों से अहिंसा के संस्कार है, जिसके डी.एन.ए में अहिंसा है”उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने सिलवानी में आयोजित प्रातःकालीन धर्मसभा में व्यक्त किये।
उन्होंने कहा कि मान लीजिये आपको मनुष्य जन्म तो मिलता लेकिन ऐसे स्थान पर जन्म लेते जंहा पर हिंसा और क्रूरता का नंगा नृत्य होता रहता है,तो सोचो तुम्हारा क्या होता?
मुनि श्री ने कहा बजाओ अपने अपने भाग्य के लिये तालीयाँ…. मुनि श्री ने कहा इतना ही नहीं मनुष्य कुल के साथ स्वस्थ शरीर,अच्छा कुल,भरा पूरा परिवार, एवं अच्छे संस्कार मिले जिससे आप सभ्य और जिम्मेदार नागरिक बनकर अपना जीवन जी रहे हो,मुनि श्री ने कहा कि यदि यह सब न मिला होता तो तुम किसी अनाथालय में पल रहे होते आवारा मवाली,लुच्चा, लफंगा जेबकतरा अपराधी की भांती जेल में बंद अपना जीवन जी रहे होते तो बताइयेगा आप सभी भाग्यशाली है या नहीं?
मुनि श्री ने चार शव्द भाग्य, सौभाग्य, हतभाग्य, और दुर्भाग्य पर चर्चा करते हुये कहा कि अनुकूल संयोग भाग्य से मिलते है,उन्होंने सिलवानी वालो के भाग्य की सराहना करते हुये कहा कि अपना रोना रोना बंद करो,यदि अपने भाग्य का हिसाब लगाओगे तो औरों से बेहतर पाओगे मुनि श्री ने कहा कि “मांगने की आदत छोड़ो जो है उसमें तृप्त होकर जीना शुरु करो” अवसर दुर्लभता से मिलता है उन अवसरों का लाभ महादुर्लभ है”
मुनि श्री ने कहा कि यह “नरभव ही बहूत बड़ा अवसर है” इसका लाभ उठाओ या इसको खो दो यह आपके हाथ में है। मान लीजिये आपको रत्नों की पोटली मिल जाये और उन रत्नों से कंचा खेलो तो उसे आप लोग क्या कहोगे? मूर्ख/ महामूर्ख तो जो इस नर भव का लाभ उठाये वह सौभाग्य और जो अवसर चूक जाये वह हतभाग्य है मुनि श्री ने कहा कि “उम्र ढल जाने के पश्चात भी मन की तृष्णा और आसक्ति नहींं मिटती संयम की राह पर चलने का मन ही नहीं होता” मुनि श्री ने पक्तियाँ सुनाते हुये कहा कि “मानव भव शास्वत सुख पाने का अदभुत मौका है,जाग हे ज्योतिपुंज यह अवसर बीता जाता, जो क्षण गया वापिस लौटकर नहीं आता” “जो मनुष्य समय रहते जागता है उसका ही भाग्य जागता है” “उठ जाग मुसाफिर भोर भयी अब रैन कंहा तू सोवत है,जो सोवत है सो खोवत है,जो जागत है सो पावत है”
मुनि श्री ने कहा कि अपनी चेतना को जगाइये और उसे सौभाग्य में बदलिये भगवान कहते है कि तुम भाग्यवान ही नहीं तुम तो भगवान हो मुझमें और तुममे कोई अंतर नहीं मेंने अपने आपको पहचाना और में भगवान बन गया तुम भी अपने आपको पहचान लोगे तो तुम भी भगवान बन जाओगे मुनि श्री ने कहा कि आप सभी तो भाग्यशाली हो जो आप लोगों ने आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागरजी महामुनिराज का आशीर्वाद पाया है और गुरुओं का सानिध्य मिलता रहता है।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312










