णमोकार महामंत्र गुणवाचक है,इसका कोई देवता नहीं:- मुनि श्री प्रमाण सागर
भोपाल
णमोकार महामंत्र के किसी भी पद का उच्चारण करो वह मंत्र बनकर आपको सुरक्षा कबच प्रदान करता है उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने णमोकार महामंत्र की विशेषता बताते हुये कहा कि यह हमारे जीवन की शुरुआत से लेकर जीवन के अंत तक हमारा संरक्षण करता है,उन्होंने कहा दुनिया में जितने भी मंत्र है,उसमें उनका कोई न कोई आराध्य देव है,लेकिन “णमोकार महामंत्र” ही एक ऐसा मंत्र है,जिसका कोई देवता नहीं इसके पाचों पद अरहंत, सिद्ध आचार्य,उपाध्याय, एवं साधू है,जो व्यक्ति बाचक नहीं,गुणवाचक है,इसमें कोई बीजाक्षर नहीं है, यह अनादि सिद्धमंत्र है इसे सिद्ध करने की भीआवश्यकता नहीं,मात्र आपको जपने की देरी है,यह शांति प्रदाता, पौष्टिक मंत्र है,इस मंत्र के जपने से किसी काअहित नहीं हो सकता,यह मंत्र कभी भी मारन उच्चाटन, विद्वेष में काम नहीं करता,हां यदि कोई आपके ऊपर मूठ या मारण विद्या का उपयोग करता है,तो उससे आपका बचाव करता है, कहते है कि मारक विद्या एक बार जब निकल जाती है तो वह यदि सामने वाले के प्राण न पाये तो जिसने उस विद्या का उपयोग किया है उसी के प्राण ले लेती है।
सबसे बड़ी विशेषता। बताते हुये कहा कि यह मंत्र को किसी भी समय किसी भी अवस्था में तथा किसी भी क्रम में जाप दे सकते है, कही भी पड़ सकते है ,यह आनपूर्वी नहीं है इसको शब्द रुप में अर्थात अकेले अ.सि.आ.उ.सा.का उच्चारण करने से भी णमोकार महामंत्र का उच्चारण हो जाता है।
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया आगामी 4 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक संस्कृत भाषा में लिपीवद्ध श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान की आराधना मुनि श्री के मुखारविन्द से प्राकृत भाषा में लिपिबद्ध बीजाक्षरों से युक्त मंत्रों के साथ प्रारंभ होगी। जिसकी संपूर्ण तैयारियां हो चुकी है जिसमें संपूर्ण भारत के श्रावक श्रैष्ठी भाग लेंगे एवं इस चातुर्मास की यह वृहद आखरी पूजा होगी।विधानाचार्य बाल ब्र.अशोक भैयाजी एवं अभय भैयाजी रहेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
