निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज को विद्वत परिषद ने श्रमण शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया

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निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधा सागर महाराज को विद्वत परिषद ने श्रमण शिरोमणि की उपाधि से विभूषित किया

अशोकनगर – परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागरजी महाराज के सान्निध्य में चल रही त्रि दिवसीय अखिल भारतीय विद्वत संगोष्ठी में देशभर से आए जैन दर्शन के जाने-माने विद्धानों के बीच आज छत्रपति साहूजी युनिवर्सिटी कानपुर के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के मुख्यातिथ्य में इस संगोष्ठी का सम्मान समारोह श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी द्वारा अखिल भारतीय विद्वत परिषद के संयोजन में सुभाष गंज मैदान में आयोजित किया गया। इस दौरान विद्वत परिषद ने निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज को श्रमण शिरोमणि पदवी से विशाल जन समूह की जय जयकार के बीच विभूषित किया ।

 

 

प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ करता ठीक नहीं है प्रकृति को अपना काम करने दे

इस दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुगंव श्री सुधासागरजी महाराज ने कहा कि आज तीर्थो की पवित्रता नष्ट हो रही है सब जगह भौतिकता की चकाचौंध का प्रभाव दिखाई दे रहा है भौतिकता कोई बुरी चीज नहीं है लेकिन जब उसका मानवीय पक्ष ही प्रभावित होने लगे तो विचार करना होगा। आज आधुनिकता की आड़ में जंगल और तीर्थ उजड़ रहे हैं प्रकृति से ज्यादा छेड़छाड़ ठीक नहीं है क्योंकि प्रकृति जब अपना रूप बदलती है तो उसे सहन करना सभी के लिए मुश्किल होता है। मां एक चाकलेट देकर काम कराती थी हमारे विद्धान पहले काम करते हैं बाद में चाकलेट मिलती है। अभी आपके कुलपति प्रो.पाठक जी कह रहे थे चाकलेट की बात यहां की चाकलेट विद्वानों को भले बाद में मिले लेकिन उनका कार्य सभी को दिखता है।

 

 

आज आधुनिकता के कारण क्षेत्र उजड़ रहे हैं जंगलों के साथ तीर्थ क्षेत्रो को बचाओ सरकार करोड़ो रुपए देना चाहते हैं हमें पर्यटन क्षेत्र नहीं बनाना है तीर्थ क्षेत्र को पर्यटन स्थल बनाने से रोकिये सम्मेद शिखर जी आज बहुत ख़तरे में है वह आधुनिकता हावी हो रही है आधुनिकता की आड़ में जंगलो और प्रकृति को नुकसान पहुंच रहा है इस रोकना होगा उन्होंने कहा कि सबसे ज़्यादा उपसर्ग भगवान श्री पार्श्वनाथ स्वामी पर हुई उनका सगा भाई दुश्मन बन गया इकतरफा दस भव तक बैर चलता रहा। पार्श्वनाथ पर तपस्या करते हुए ज्योतिष देव ने उपसर्ग किया कोई तीर्थंकर पर इतना उपसर्ग नहीं हुआ जितना पार्श्वनाथ पर हुआ ज्योतिष देव बढ़ा होता है धरणेन्द पद्मावती छोटे देव था वह उन्हें रोक नहीं सकता था तब भी उसने क्या किया जैसे आप लोग जब कोई बड़ा आदमी किसी को मारता है तो आप क्या करते हैं बचा सकते हैं वैसे ही छोटा देव अपनी विधि से बचा ले गया उसी समय उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हो गई। और फिर कमठ को भी सम्बोधन मिला और वह भी प्रभु की शरण में पहुंच गया तो ये कथाएं हमें बता रही है कि आप चिंता मत करो कितना ही कष्ट आये सब कुछ समाप्त हो जायेगा।

 

 

 

 

 राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक ने कहा कि जो हम लोगों ने आपके अशोकनगर पर लिखी गई कृति का विमोचन किया तो हम कहना चाहते हैं कि ये ऐसे संत हैं जिनकी कोई नगर समाज ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण सृष्टि अगवानी करती हैं। मां जिस प्रकार से बच्चों का पालन करती है वैसे ही गुरु देव हमारे जीवन को संभालते हैं गुरु देव के चरणों की रज पाने हर मानव लालयित रहता है जीवन में संतों का स्थान सबसे श्रेष्ठ होता है और जब संतश्री जैसी विभूति हमारे सामने बैठे हो तो मैं अपने जीवन के सर्वश्रेष्ठ पलों को जी रहा हूं तुलसी दास जी लिखते है कि संतश्री हमारे मुख को देख ले तो जन्मो के पातक कट जाते हैं जब मैं कोटा था और भगवान महावीर विश्व विद्यालय में गया मेरी भावना थी कि महावीर स्वामी का प्रतीक चिन्ह होना चाहिए और मैंने निवेदन किया उनकी कृपा हुई आपके आशीर्वाद से हमने जैन पीठ में विद्या सुधा सागर विद्या पीठ की स्थापना की।

 

 

 

 

   आपका पथ प्रदर्शक करना सबसे महत्वपूर्ण है

उन्होंने कहा कि मुझे सबसे महत्वपूर्ण बात लग रही है आज सारा विश्व, युद्ध की कगार पर पहुंच गया है भौतिक चकाचौंध से परेशान हैं ऐसे समय में आपका पथ प्रदर्शक बहुत जरूरी है आज का युवा बहुत परेशान हैं आज के युवा तकनीकी का बहुत प्रयोग कर रहे हैं मुझे ऐसा लगता है कि ऐसे दौर में जैन वांग मय को जानने की आवश्यकता है इन युवाओं को ए आई जैसी तकनीकी के जाल से मुक्त कर हमारे संस्कारों को पुनः स्थापित करें।

 

 

 

 आपकी कृपा होगी तो हम कानपुर विश्व विद्यालय के माध्यम से मानव कल्याण के लिए कुछ कर पाये इस दिशा में बहुत तेजी से काम करना होगा 

कबीर ने कहा कि गुरु को चाहिए कि शिष्य से कछु ना लेया और शिष्य को चाहिए वह गुरु को सब कुछ देय 

हम भी तो यही करने आज यहां आयें है ये ऐसे संत हैं जिनके अंदर 

इंजिनीयर भी है डॉक्टर भी है और कृपा बरसाने वाली सहजता सरलता तो भरी हुई है ।

 

 

विद्धानों का सम्मान किया समाज जनों के साथ श्रेष्ठी वर्ग ने

विद्वत संगोष्ठी के दौरान श्री दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी एवं राजेन्द्र जैन मैमोरियल ट्रस्ट सूरज दारा कुलपति प्रो विनय कुमार पाठक को इस वर्ष के संत सुधा सागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया इस दौरान उन्हें एक लाख रुपए की सम्मान निधि प्रस्तुति पत्र साल श्री फल ट्रस्ट के ज्ञानेन्द्र गदिया सूरज जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल महामंत्री राकेश अमरोद कोषाध्यक्ष सुनील अखाई उपाध्यक्ष अजित बरोदिया प्रदीप तारई राजेन्द्र अमन मंत्री विजय धुर्रा मंत्री संजीव भारिल्ल, मीडिया प्रभारी अरविंद कचनार, आडिटर सजंय के टी, थूवोनजी अध्यक्ष अशोक जैन टींगू मिल महामंत्री मनोज भैसरवास सहित अन्य प्रमुख जनो दारा किया गया इस दौरान राष्ट्रीय विद्वत परिषद के पूर्व महामंत्री श्री कर्मयोगी सुरेन्द्र भारती जी को भी विशिष्ट पुरस्कार से सम्मानित, प्रो जयकुमार मुजफ्फरनगर प्राचार्य डॉ अशोक जी लाडनूं सुजानगढ़ महामंत्री डॉ विजय कुमार दिल्ली डा किरण प्रकाश जी सहित अन्य प्रमुख विव्दानो सहित सभी को सम्मानित किया गया ।

            संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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