द्वादश वर्षीय पाठ्यक्रम पर अखिल भारतीय विद्यार्थी सम्मेलन 22 सितंबर कोधन हमेशा सुख नहीं देता, कई बार दुख का कारण भी बनता है: मुनिश्री सुधासागर महाराज
अशोकनगर
पुण्य का उदय कभी सुखदाई कभी दुखदाई हो जाता है पैसे के कारण डाकू पैसे वाले को मार देता है। भुज में जब भूकम्प आया तो जिनके बड़े बड़े मकान हवेलियां थीं वे धराशायी हो गई,उसमें रहने वाले सब ऊपर चले गए। जिनके झोपड़ पट्टी थी वे गरीब सब बच गये। वो अपने को उस समय को सौभाग्यशाली मान रहे थे तो ये जरूरी नहीं है धन सुख ही दे । उक्त आश्य के उद्गार सुभाषगंज मैदान में विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने व्यक्त किए।
मुनिश्री ने कहा कि जो हमें अच्छा लग रहा हैं वह सुख का दिन पापों का बीज बनकर दुःख देता है ये जरूरी नहीं हैं वह दुःख ही था पुण्य पाप का बीज बन जाता है। ये मत समझना कि लोग दुश्मन बनकर बदला लेते हैं कभी कभी सगे बनकर भी दुःख देने आ जाते हैं। वहीं जीवन के लिए दुःख का कारण बन जातें है बहुत सावधानी से रहना है दुनिया में धर्म तुम्हारे लिए संसार में रहना सिखायेगा। संसार में हमें तय किस विधि से रहना है तो रहना कैसे हैं ये तो सीख हो पांच पाप करना सीखलें, धर्म से कोई बात नहीं पांच पापों से किस तरह से बच सकते हैं किसकी हिंसा करना कब हिंसा करना कैसे हिंसा करना सैनिक को चौबीस घंटे हिंसा करने की छूट दी गई है। सैनिक की कभी भी दुर्गति नहीं बताई। सभी शास्त्रों में आया है आज जो आप शान्ति से बैठकर धर्म ध्यान कर रहे हैं। इसके पीछे जो दिन रात सीमा पर पहरा दे रहे ये उसी का परिणाम है कि जीवन आनंद में बना है।
पापके लिए भी धर्म करते हैं जगत के लोग
उन्होंने कहा कि बिना कर्म किये कभी किसी को सजा हो ही नहीं सकती। बकरे को कटना है तो कटेगा तुम क्यों बचा रहे हो पापी को भी पाप से बचाना भी धर्म है नहीं तो फिर से ये अपराध करेगा गरीब को नहीं उठा रहा हूं मैं तो सेठ को दुर्गति जाने से बचा रहा हूं। यदि सेठ परिग्रह के साथ मरेगा तो नरक जाएगा।
बिना परिग्रह के संसारी रह नहीं सकता
उन्होंने कहा कि जो धन से पाप करते हैं जो लोगों के घरों को धन से उजाड़े है। धन के बल पर दूसरों के प्राण लेने वाले के धन का हरण हो जाये तो कोई बात नहीं क्योंकि यदि उसके पास धन रहा तो किसी के प्राणों का घात हो जाएगा। दूसरे व्यक्ति दुखी पहुंच रहे हैं पाप की विधि बताई है बिना परिग्रह के संसारीव्यक्ति नहीं रह सकता। इसके लिए षट्कर्म की शिक्षा दी। परिग्रह पाप है पापकरने कौन सिखा रहा है। मोक्षगामी राजा रिषभ देव महापुरुष थे उन्होंने कृषि करना सिखाया, तलवार चलाना सिखाया, जब भी तलवार चलेगी तो कोई ना कोई का मर जाना निश्चित है फिर भी सिखाया क्योंकि हम संसार को सुरक्षित करे।
विद्वानों के साथ विद्यार्थियों की होगी संगोष्ठी
परम पूज्य मुनि पुंगव श्रीसुधासागरजी महाराज के आशीर्वाद से द्वादश वर्षीय पाठ्यक्रम पर अखिल भारतीय विद्यार्थी सम्मेलन 22 सितंबर को अशोक नगर जैन समाज द्वारा कियाजा रहा है। इसमें देशभर से द्वादश वर्षीय पाठ्यक्रम के श्रेष्ठ विद्यार्थियों के साथ संयोजक सह संयोजक को अपनी भावनाओं को रखने के साथ ही वृहद सम्मेलन होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





