सैनिक शत्रुओं से देश की रक्षा करते हैं तो साधु कर्मों से आत्मा की रक्षा करने में सहायता करते हैं आचार्य श्री विशुद्धसागर महाराज
उज्जैन
सच्चा सैनिक रणभूमि में अपने प्राण न्योछावर कर देता है पर वह युद्ध भूमि को छोड़कर नहीं भागता है। ऐसे ही सच्चा साधुअपने प्राणों को छोड़ देता है पर अपने साधु पद को नहीं छोड़ता श्रेष्ठ पुरुष संकटों के समय में भी अपने कर्तव्यों को नहीं छोड़ते है। सैनिक शत्रुओं से देश की रक्षा करते हैं तो साधु कर्मों से आत्मा की रक्षा करने में सहायता करते हैं। शहर में विराजित आचार्य श्री 108 विशुद्धसागरजी गुरुदेव ने धर्मसभा में यह आशीर्वचन दिए ।
आचार्यश्री ने कहा कि देश के सम्राट एवं मंत्री को पक्षपात से शून्य रहना चाहिए। सच्चा सम्राट धर्म,पंथ, परिवार, जाति आदि के पक्ष से रहित समदृष्टि वाला होता है, जो सम्राट पक्षपात करता है, उसका राज्य नष्ट हो जाता है।भ्रम से बचो, आनंदपूर्वक जियो, शंका या भ्रम निवारण का कोई उपाय नहीं है।समस्या का समाधान हो सकता है पर शंका का समाधान संभव नहीं है। भ्रम संपूर्णअनथों की जड़ है। संसार में शांति नहीं,भ्रम में सुख नहीं, शंका में आनंद नहीं, भ्रमसे बचो, भ्रम में फंसा व्यक्ति हमेशा दुःखीरहता है। शंका संबंधों को खराब उत्पन्न करदेती है। शंकाशील अशांत जीवन जीता है। भ्रम हटाओ आनंद पूर्वक जियो, जीवन यापन करो।


धर्म के विषय में बताया की सत्य ही धर्म है, सत्य ही शिव है, सत्य ही सुंदर हैआचार्य ने कहा कि सत्य जानो, सत्य मानो, सत्य पूर्ण जीवन जीना प्रारंभ करो, सत्य ही धर्म है। सत्य ही शिव है। सत्य ही सुंदर है और सत्य ही आनंद है। सत्य जीवन का श्रृंगार है। सत्य आनंद का द्वार है।सत्य सुख का आधार है। सत्यवादी का सर्वत्र सम्मान होता है।पूर्ण जीवन कठिन हो सकता है पर वह सुख पूर्ण ही होता है रहना है तो सत्य सुनो, सत्य बोलो, सत्य लिखो, सत्य पढ़ो।




भाव संभल गए तो सब संभल जाएंगे
आचार्यश्री ने कहा कि परिणाम विशुद्ध करो शांतिपूर्वक जियो, अपनेभावों को संभालो भाव संभल गए तो सब संभल जाएंगे। भावों के विकार से ही नवीन भाव प्राप्त होते हैं। भावों पर ही भविष्य बनता है।
उत्साह उमंग जीवन जीने से सिद्धियां होने लगती हैं
आचार्य श्री ने कहा की उत्साह, उमंग से शक्ति का संचार होता है, जो उत्साहपूर्वक जीवन जीता है, उसे सिद्धियां सिद्ध होने लगते हैं। उमंग पूर्ण जीवन जियो, जियो और जीने दो, हजारों उत्साहितों से एक उमंगशील व्यक्ति श्रेष्ठ होता है, जहांउमंग होती है, वहां झलक स्वयं दिखाई देती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
