कुण्डलपुर हथकरधा केंद्र मे अब खादी वस्त्र के साथ रुई का धागा भी निर्मित होगा
कुण्डलपुर
कुंडलपुर हथकरघा केंद्र जो एक नई पहचान ले चुका है अब वहा पर खादी वस्त्र निर्मित होने के साथ-साथ अब सूत बनाने का काम भी गति लेने लगा है।
केसे होगा यह कार्य
यह कार्य ऐसे होगा पहले यहां पर सूत तैयार किया जाएगा, उसके बाद उससे कपड़े निर्मित होगे। इस हथकरधा केंद्र मे सूत से धागा बनाने की पहली खेप तैयार की जा चुकी है। मिली जानकारी अनुसार इससे पूर्व यहां पर गुजरात से धागा आया करता था और उससे ही यहां पर कपड़ा निर्मित होता था। जिससे इसमे लागत अधिक होती थी साथ ही समय भी अधिक लगता था, लेकिन अब इस समस्या का समाधान हो चुका है अब कुंडलपुर में सूत तैयार करके किया जा रहा है।
तीन हज़ार से अधिक साडिया निर्मित होती है
इस केंद्र पर वर्तमान में मिली जानकारी अनुसार एक महीने मे तीन हज़ार से अधिक साडिया निर्मित होती है जिसे ओन लाइन और स्टॉल पर बेचा जाता है।
विदेशो मे इसकी मांग
इन साड़ियो की इतनी मांग है की कुछ व्यापारी यहां की साड़ियां विदेश में भी बेचने के लिए भेज रहे हैं। जानकारी देते हुए केंद्र के व्यवस्थापक ब्रम्हाचारी सुलभ भैया ने बताया कि आचार्यश्री विद्या सागर महाराज की पहल पर हथकरघा केंद्र प्रारंभ किया गया था। इसमें तैयार होने वाले वस्त्र पूरी तरह अहिंसक होते हैं। हथकरघा केन्द्र में अब सूत बनाने का काम चालू हो गया है। केवल यहां पर रूई बुलाई जा रही है, जिससे धागा बनाया जाता है और उससे कपड़ा तैयार होता है। इसके लिए अलग-अलग मशीन लगाईं गईं हैं। रूई से धागा बनाने का काम बढ़ने से यहां पर युवाओं को रोजगार भी मिल रहा है। 30 से ज्यादा युवा यहां पर रोजगार पा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इससे पहले बीना बारह में भी रूई से धागा बनाने का काम होता था, लेकिन बीच में उसे बंद कर दिया गया। अब कुंडलपुर में इसकी पहल की गई है। स्थानीय स्तर पर बने धागा से हथकरघा केन्द्र में साड़ियां, दुपट्टे, कुर्ता, पायजामा, गमछा सहित सभी प्रकार के सूती वस्त्र तैयार किये जाएंगे।
कारीगरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है
यह सूती वस्त्र सफेद और विभिन्न रंगों के होते हैं। जिन्हें बाद में अलग-अलग तरह से तैयार किया जाता है। यहां पर कपड़ा तैयार करने से पहले कारीगरों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में इस केन्द्र पर वस्त्रों का निर्माण बड़े स्तर पर होगा। इससे अनेक लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। क्योंकि अहिंसक वस्त्रों की डिमांड पूरे विश्व में है। आचार्यश्री के मार्गदर्शन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वदेशी वस्त्र निर्माण का सपना यहीं से पूरा होने जा रहा है।
संकलित अभिषेक जैन लूहाडीया रामगंजमंडी
