कर्तव्य की पगडंडी पर चलता रहे मनुष्य, तो वह राष्ट्र भी महान बन सकता है। संभव सागर महाराज

धर्म

कर्तव्य की पगडंडी पर चलता रहे मनुष्य, तो वह राष्ट्र भी महान बन सकता है। संभव सागर महाराज

खुरई

धर्म प्राण नगरी खुरई मे पूज्य मुनि श्री  संभव सागर महाराज के मुख से मूकमाटी महाकाव्य की वाचना हो रही है उन्होने कहा वर्तमान समय में व्यक्ति एक ही समय में कई कामों को निबटाने का असफल प्रयास करता है। यह धारणा ठीक नहीं उन्होने सभी भक्तो को सन्देश देते हुइ कहा मंदिरजी में भी श्रावक पूजा करते करते मुनि संघ के प्रवचन एवं अन्य कार्य भी करना चाहता है। इससे उस मानव को  कुछ भी हासिल नहीं हो पाता है। एक उदाहरण के माध्यम से कहा उस व्यक्ति का हाल भी धोबी के गधे की तरह हो जाता है, जो न तो घर का हो पाता है न ही घाट का। इसी तरह यह संसारी प्राणी जो भी अपने घर-गृहस्थी के काम अथवा व्यवसाय आदि करता है, उसमें भी उसी को सफलता मिलती है जब वह कोई भी कार्य एकाग्रता एवं तनमयता के साथ सलग्न होकर करता है।

साधु साध्वी व श्रावक श्राविकाओ के कर्तव्य का बोध कराया

पूज्य मूनी श्री ने साधु साध्वी व श्रावक श्राविकाओ के कर्तव्य का बोध कराते हुए कहा की साधु साध्वीयो का भी कर्तव्य     है कि वह धर्म उपदेश दें और साथ ही श्रावक श्राविकाओं का कर्तव्य है कि उसे श्रद्धा के साथ सुनकर अपने जीवन के व्यवहार में उतारें। इसी प्रकार अधिकारी व कर्मचारी तथा निजी संस्थानों में मालिक व कर्मचारी के भी कर्त्तव्य हैं। मालिक कर्मचारी के हितों का ध्यान रखें और कर्मचारी अपनी जवाबदारी को निष्ठा व ईमानदारी से निभाएं, तो इस धरती पर स्वर्ग सा आनंद मिलेगा।

कर्तव्य हैवान को इंसान बना देता है।

पूज्य मुनि श्री ने आगे कहा गरीब व पीड़ित के प्रति भी अपने कर्त्तव्यों को याद कर लें। उनकी हर तरह से मदद करना हमारा पावन कर्त्तव्य है। कर्तव्य ही हैवान को इंसान बना देता है। कर्त्तव्य इंसान को महान बना देता है। कर्त्तव्य की पगडंडी पर चलता रहे मनुष्य, तो वह राष्ट्र भी महान बन सकता है। उन्हाेंने कहा कि भगवान महावीर का अमर संदेश ‘जियो और जीने दो’। अपने अपने कर्त्तव्यों को निभाएं, जो व्यक्ति जिस क्षेत्र में कार्यरत है, उस क्षेत्र में उसके जो कर्त्तव्य हैं उनको पूरी तरह से निभाना चाहिए। जिस देश का हर नागरिक अपने कर्त्तव्य का परिपालन करता है, वह राष्ट्र श्रेष्ठ कहलाता है।

संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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