अपना मौन इज्जत वाले के सामने खोलना। दुष्ट के सामने सत्य मत रखना। दुष्ट और ज्यादा भड़कते हैं मुनि श्री सुधा सागर महाराज
अशोकनगर
निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 सुधासागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि बाहर वाले को कलश ना मिले, हम अपने द्रव्य का सदुपयोग कर सके। महाराज के साथ कुबेर चलते हैं। मैं भी महाराज का कुबेर बनूंगा।
सूरत शहर का दिया उदाहरण
सूरत में हुए चातुर्मास का जिक्र करते हुए पूज्य मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि श्रावक संस्कार शिविर सूरत का पुण्यार्जक कहता है जीवन भर शिविर मेरे परिवार से होगा। मैंने कहा कि यदि एक ही व्यक्ति शिविर लगाता रहा तो हर नगर कुबेर कहां से आएंगे और आज तक सूरत वाले की आवश्यकता ही नहीं हुई। अपना मौन इज्जत वाले के सामने खोलना, दुष्ट के सामने मत रखना, दुष्ट और ज्यादा भड़कते चले जाते हैं। 

महाराज श्री ने कहा कि महान व्यक्ति तो वह है जो समर्थवान होकर असमर्थ से संधि कर रहा है तो समझ लेना की वह कोई महान व्यक्ति है।
विभीषण का दिया उदाहरण
महाराज श्री ने विभीषण का उदाहरण देते हुए कहा कि जब विभीषण श्री रामचंद्र की शरण में पहुंचे तो श्री राम ने कहा कि आप अपने भाई को समझाएं यदि अभी रावण समझ जाएंगे तो ये युद्ध रुक जाएगा। जो महान पुरुष होते हैं वह हमेशा अच्छाई के लिए कार्य करते रहते हैं। जो काम आप स्वयं कर सकते हो उसे स्वयं ही करना चाहिए इससे शक्ति बढ़ेगी। आपके निकट कोई सो रहा है और आपको नींद नहीं आ रही है उसमें वह खर्राटे ले रहा है तो उसके प्रति क्रोध मत करना। अपने मुख को हाथ लगाकर रोक लेना सोचना कि मुझे नींद आ नहीं रही कम से कम व्यक्ति तो आराम से विश्राम करें। यदि आप अधिकतम 6 महीने करेंगे तो फिर देखना क्या होता है। 

अहंकार को पुष्ट करने में दुष्ट जीव पीछे नहीं रहते
महाराज श्री ने अहंकार के विषय में कहा कि दुष्ट कभी अहंकार को पुष्ट करने में पीछे नहीं रहते है। श्री कृष्ण का उदाहरण देते हुए कहा कि श्री कृष्णा शक्तिशाली होकर भी दूत बनकर चले गए समर्थ होकर भी मौन बैठे हैं। खोटा आदमी कभी मौन धारण नहीं करता। वह अपनी बात को सिद्ध करने के लिए बार-बार झूठ बोलता चला जाता है। सत्यवान मौन हो जाता है। सत्यवान की एक दिन विजय होती है। असत्य बोलने वाला बार-बार बोलकर अपनी बात को सिद्ध करना चाहता है तुम शक्तिमान हो समर्थवान हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312




