अनंत चतुर्दशी पर्व पर होगा लघु सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं निकलेगी भव्य शोभायात्राव्यक्ति के जीवन में अनासक्त भाव होता है तब आकिंचन प्राप्त होता है आचार्य श्री

धर्म

अनंत चतुर्दशी पर्व पर होगा लघु सिद्ध चक्र महामंडल विधान एवं निकलेगी भव्य शोभायात्राव्यक्ति के जीवन में अनासक्त भाव होता है तब आकिंचन प्राप्त होता है आचार्य श्री

रामगंजमंडी 

अनंत चतुर्दशी के पर्व के साथ 10 लक्षण पर्व का समापन हो जाएगा समापन के क्रम में सर्वप्रथम श्री जी का अभिषेक शांति धारा उपरांत प्रवचन भवन में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में श्रीजी का अभिषेक एवं शांति धारा की जाएगी उसके उपरांत तत्वार्थ सूत्र के तीन मुख्य मंडल पर तीन मुख्य परिवारों द्वारा अरघ समर्पित किए जाएंगे इसके साथ ही गुरुदेव के उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर मंगल प्रवचन होंगे मंगल प्रवचन उपरांत 3 घंटे में लघु सिद्ध चक्र महामंडल विधान आयोजित किया जाएगा जिसको लेकर तैयारियां पूर्ण कर दी गई है दोपहर की बेला में 10 लक्षण पर्व के समापन अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी उसके उपरांत आचार्य श्री के सानिध्य में श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा संपन्न होगी एवं संध्या बेला में प्रतिक्रमण शंका समाधान एवं रात्रि में प्रवचन होंगे इसके साथ ही10 लक्षण महापर्व का समापन होगा। 

 

 

    समाज के संरक्षक अजीत सेठी अध्यक्ष दिलीप विनायका उपाध्यक्ष चेतन बागड़िया उपाध्यक्ष कमल लुहाड़िया महामंत्री राजकुमार गंगवाल मंत्री राजीव बाकलीवाल ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि अनंत चतुर्दशी के अगले दिवस 7 सितंबर को समस्त तपस्वियों का पारणा आचार्य श्री के सानिध्य में श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन धर्मशाला में भव्यता के साथ संपन्न होगा।

 

शुक्रवार की बेला में दशलक्षण पर्व के 9वे दिवस आचार्य श्री ने उत्तम अंकिंचन धर्म पर प्रकाश डाला परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चयसागर महाराज ने उत्तम आकिंचन्य धर्म पर प्रकाश डाला उन्होंने कहा तप से संयम आने के बाद अंत में यही निर्णय सामने आता है कि शरीर भी मेरा नहीं है जहां देह अपनी नहीं रोज आप मरते हुए व्यक्ति को देखते हैं व्यक्ति ने देह की बहुत सुरक्षा की व्यवस्था की और अंत में वह देह को छोड़कर चला गया। हमारा संपूर्ण देह पर है और हमारी आसक्ति उपयोग देह पर यह प्रैक्टिकल है। यह किसी के साथ नहीं जाती।

        

उन्होंने कहा कि बनारस, गया, इलाहाबाद जाकर देखना किसी भी घाट पर जाकर देखना संपूर्ण देश से वहां लोग मरे हुए लोगों का देह विसर्जन करने के लिए आते हैं। वह दृश्य देख ले तो एक क्षण में समझ आ जाएगा की मेरा कुछ भी नहीं हूं मैं आकिंचन हूं। और वह लाइन सार्थक रूप प्रदर्शित होती है कि जहां देह अपनी नहीं तहा न अपना कोय

 

 पर्यूषण पर्व आत्मा की सफाई का अभियान होता है 

 आचार्य श्री ने कहा पर्यूषण पर्व आत्मा की सफाई का पर्व होता है क्षमा से शुरू किया था गंदगी निकालने का काम पर्यूषण पर्व एक सफाई अभियान होता है आत्मा की सफाई का अभियान होता है। क्षमा से हम अंकिंचन तक पहुंचे है तो आठ धर्मों में हमने सिर्फ सफाई की है, आज हमें उसकी उपलब्धि हुई है हमें आंकिंचन भाव आया है। दिमाग में त्याग करने के बाद विकल्प ठहरा रहता है और त्याग की हुई वस्तु पर यदि विकल्प ठहरा रहता है तो हम आकिंचन को प्राप्त नहीं कर सकते जब त्याग अनासक्त भाव का हो जाता है तो आकिंचन प्राप्त हो सकता है। बहुत सीधा धर्म है घर जाकर बैठ जाओ आप घर जाकर सोचे मेरा कुछ नहीं है। परिवार मित्र कोई भी सामने आ जाए मन में सिर्फ यह भाव आए मेरा कुछ भी नहीं है।

 

वैराग्य भी ऑनलाइन आता है लेकिन आप ध्यान नहीं देते

  आचार्य श्री ने कहा कि जैसे ही व्यक्ति की उम्र ढलती है उसे तैयारी करनी चाहिए कि इस पर्याय के बाद जाएंगे कहां यह तो ऑनलाइन का जमाना है ना घर बैठे टिकट आ जाती है पहले तो लाइन में लगना पड़ता था टैक्सी ऑटो भी अब घर बैठे आने लगे हैं क्या बचा है जो घर बैठे नहीं आता सिर्फ भगवान बचे अगर आप लोगों का बस चले तो आप भगवान को भी ऑनलाइन बुलाओगे वैराग्य भी ऑनलाइन आता है लेकिन आप ध्यान नहीं देते कोरोना बीमारी की ओर दृष्टिगत करते हुए गुरुदेव ने कहा कि कोरोना में घर बैठे थे रोज सुनते थे वहां इतने मर गए वहां इतने पूरे देश के आंकड़े आ जाते थे हजारों में यह सूचना आ रही फिर भी वैराग्य भी नहीं आ रहा है। यह वो कारण है जो वैराग्य के है और अनासक्ति के है। वो कारण बताए जा रहे हैं जो उत्तम आंकिंचन धर्म को धारण करने के हैं।

   

 

छोड़ना बहुत कठिन काम है 

  जब तक वस्तु के प्रति संशय और जिज्ञासा है लगाव है राग है तब तक छोड़ने के बाद भी आप उसे छोड नहीं पाए हो। छोडने का मतलब तो है आपके लिए छोड़ने के बाद भी जड़ से निकृष्ट हो जाए छोड़ना बहुत कठिन काम है शरीर से छूटता है तो मन से नहीं छूटता मन से छूटता है तो शरीर से नहीं छूटता शरीर और मन से छूटता है तब आंकिंचन धर्म प्रवेश करता है। 

 

तुम्हारा नाटक से किसी को फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हें ही पड़ेगा यह कर्म सिद्धांत है भगवान महावीर स्वामी ने कहा है करो जितना करना है किसी को फर्क नहीं पड़ेगा तुम्हें ही पड़ेगा जो करेगा उसे ही फर्क पड़ेगा जो नहीं करेगा उसे नहीं। 

   अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *