चमत्कार तो मन्दिर के धोती दुपट्टा में भी हो जायेगा इसका उपयोग सही विधि करें–मुनि पुंगव श्रीसुधासागर महाराज पूज्य बनो या पूजा करों ये दो ही रास्ते हैं
टीकमगढ़ —
ये दुर्लभ मनुष्य पर्याय जैन कुल पाकर दो ही रास्ते हैं पूज्य बनो या पूजा करो इनके अलावा कोई मार्ग ही नहीं है तीसरा तो फिर तीये की वैठक है इसके अलावा ना कोई मार्ग था ना है और ना ही होगा आप अपने लिए आप अपने मन्दिर का अतिशय बढ़ाना चाहते हैं इसका सबसे सरल उपाय है प्रभु की भक्ति आराधना विधि पूर्वक करने पर अतिशय होगा। हर जगह अतिशय है तुम जो मन्दिर में धोती दुपट्टा पहन कर आते हो उनमें भी अतिशय इसको सही विधि से उपयोग करें तब ही ये अपना प्रभाव दिखाते हैं।

मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने नन्दीश्वर मैदान में धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए महोत्सव के प्रवक्ता प्रदीप जैन बम्होरी ने बताया कि शाम को जिज्ञासा समाधान के दौरान श्री मद् जिनेन्द्र त्रिकाल चौबीस पंच कल्याणक महोत्सव के प्रतिष्ठ चार्य प्रदीप भइया सुयश अशोक नगर का सम्मान शाल श्रीफल देकर कमेटी द्वारा किया गया।


वक्ता की प्रमाणता से वचनों की प्रमाणता होती है
पूज्य मुनिश्री ने कहा वक्ता की प्रमाणता से वचनों की प्रमाणता होती है। णमोकार मंत्र की महिमा नहीं है णमोकार मंत्र पढ़ने वाले की महिमा है। अभिषेक की विशेषता नहीं है, जल भी वही है, भगवान भी वही है। लेकिन अभिषेक करने वाले की विशेषता है कि चमत्कार हो जाता है। अभिषेक करने वाले केभाव कैसे हैं वो किस परिणाम से प्रभु के ऊपर कलशा ढाल रहा है वैसी ही विशेषता उस गंधोदक में आ जाएगी। जो काम विधि पूर्वक किया जाता है उसका फल अलग ही होता है ।

आज भी पूजन में चमत्कार हो सकता है
मुनि पुंगव ने कहा कि आज भी पूजन का चमत्कार हो सकता हुआ है इसी पंचम काल में एक मात्र शब्द बोला वो था निसही निंसही धन्जय कवि ने बोल दिया धन्जय कवि पूजा कर रहे थे घटना घटती धन्जय के बेटे को सर्प काट लेता हैएम उसके प्राण पखेरु उड़ जाते हैं सभी लोग मन्दिर पहुंचते हैं कवि अपनी भक्ति में लीन हैं धर्म कार्य करते समय कोई भी संकट आ जाये आप तत्काल कहते हैं ये धर्म के कारण आ गया।

पूरी पूजन करने के बाद सेठ जी शान्ति पाठ पढ़ते हुए जैसे ही पढ़ा गया होवे सारी प्रजा को सुखबल युत हो धर्मधारी नरेशा कहते ही वह विषधर का कांटा हुआ बच्चा ऊठ खड़ा हुआ तो अतिशय तो पूजा में भी है आप लोगो के यहां वर्षों से पूजन हो रही है सबसे बुजुर्ग बता रहे है कि पचास साल पहले जो पूजन की थाली वहीं है वहीं सुबह है और आपके भोजन की थाली। महानुभाव आपके भोजन की थाली बदल गई पानी के लोटे के स्थान पर बिस्लरी की बोतल आ गई व्यक्ति तो वहीं है लेकिन भावना बदल गई।
माताजी की बात सुनकर चोरो ने छोड़ी चोरी
उन्होंने कहा कि एक गांव में एक माताजी के घर चोर घुस आए चोर तो मां जी कहती हैं ले जा जो ले जाना हो, क्योंकि चोर कभी सेठ नहीं बन सकता। हमारे समान है, तुम्हारे बच्चे भूखे होंगे। ले जाओ हम सोच रहे थे छ बार चोरी करके साहूकार हो गये होंगे तुम तो चोर के चोर रहे। हमारे यहां से तुम सब कुछ ले गये और हम सेठ के सेठ रहे, और तुम चोर के चोर।
ये बात उन चोरो को चुभ गई और उन्होंने उसी समय चोरी का त्याग कर चोर पीछे के द्वार से आने वाले आगे के द्वार से चलें गये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
