जो अकड़ता है वह उखड़ता है,जो झुकता है वह टिकता है प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

जो अकड़ता है वह उखड़ता है,जो झुकता है वह टिकता है प्रमाण सागर महाराज 

भोपाल 

जो अकड़ता है वह उखड़ता है,जो झुकता है वह टिकता है उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने दशलक्षण पर्व के दूसरे दिवस उत्तम मार्दव धर्म के संद्रभ में विद्याप्रमाण गुरुकुलम में प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये”*

   

 

 मुनि श्री ने आज के संद्रभ में चार बातें बताते हुये कहा कि झुको,मिलो,सुनो, सहो “जो झुकता है वह टिकता है” झुकना सीखो नम्रता को अपने जीवन का आदर्श बनाओ उन्होंने अहंकारी की विशेषता बताते हुये कहा वह टूटने को, दुःखी होंने को राजी होता है लेकिन झुकने को तैयार नहीं होता संत कहते है जीवन मिला है जीवन में सब कुछ हमारे अनुसार नहीं चलेगा कुछ बातें हमारे मन की होती है,तो कुछ बातें अपने मन की बनाना पड़ती है। जो अड़े रहते है,और खड़े रहते वह उखड़ जाते है,जो एडजेस्ट करके चलते है वही जीवन की ऊंचाइयों को प्राप्त करते है।

 

 

 

 मुनि श्री ने पानी और बर्फ का उदाहरण देते हुये कहा कि पानी को जिस बर्तन में डालो एडजेस्ट हो जाता है जबकि बर्फ को एडजेस्ट करने के लिये कूटना पढ़ता है संत कहते है पानी बन जाओ सभी जगह स्थान बना लोगे बर्फ जैसा जीवन बनाओगे तो कुटना पड़ेगा।

 

 

 मुनि श्री ने कहा कि जो झुकेगा वह दूसरों को भी झुका पाऐगा अहंकार में डूबा मनूष्य न तो खुद का भला कर पाता है न दूसरे का जैसे पेड़ जितना फलदार होता है उसकी शाखाएँ उतनी झुकी होती है,मुनि श्री ने कहा कि “अकड़ मुर्दे की पहचान हुआ करती है झुकता वही है जिसमें जान है” अपने जीवन को जीवन्त बनाना चाहते हो तो मार्दव धर्म को अपनाओ,और झुकना सीखो मुनि श्री ने कहा कि अपना अपना ईगो छोड़ो उन्होंने कहा कि पति पत्नी में अनबन हो गई गुस्से में पत्नी ने कह दिया में अपने मायके जा रही पति अपने काम पर निकल गया और पत्नी को समझ आई और मायके न जाकर अपने घर वापिस आ गई सांयकाल पति भी घर आ गया दोनों आमने सामने है लेकिन दोनों बोलने को तेयार नहीं उनकी तीन साल का बच्चा था वह मंदिर में गुरु के मुख से एक गीत सुना था वह उसे याद था उसके बोल थे “रुक मत प्राणी झुकजा, जीवन सुखी बन जाएगा” वह बार बार कभी मां की तरफ तो पिता की तरफ मुख करके सुनाता रहा दोनों को हंसी आई और दोनों एक साथ बोल पड़े गलती हमारी थी और क्षमा मांगी पति ने कहा में तुम्हें लेने तुम्हारे घर गया था तो मालुम पड़ा कि तुम तो वहा गई ही नहीं तो पत्नी ने कहा कि आपके जाने के बाद मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ और मैं कही नहीं गई पतिदेव आप मुझे क्षमा करें।

मुनि श्री ने कहा कि दोनों एक दूसरे के सामने झुक गये तो परिवार टिक गया यदि एक दूसरे के सामने झुकने को तैयार नहीं होते मामला गड़बड़ा जाता।

 

 

 

उन्होंने आज का मंत्र देते हुये कहा कि”झुकोगे तो टिकोगे, अकड़ोगे तो उखड़ोगे” 

“मिलो” अर्थात मिलनसार बनो मुनि श्री ने कहा कि कुछ लोग अपने आपको रिजर्व रखते है, रिजर्व रहो लेकिन अभिमान मत करो।

 

 

 

उन्होंने कहा बड़ा आदमी वह नहीं जिसके पास बड़ी गाड़ी हो, बड़ा मकान हो नौकर चाकर गाय भेंस आदि पशु हो, बडा़ आदमी वह है जिसके पास आने वाला कोई भी व्यक्ती अपने आपको छोटा महसूस न करें।मुनि श्री ने कहा कि हर व्यक्ती में कुछ न कुछ गुण अवश्य होते है उनकी अच्छाइयों को देखो मुनि श्री ने कहा बड़प्पन तभी है जब दूसरों को मान देना शुरु करो तथा कथित ऐसे बड़े आदमी मत बनो कि तुम्हारे घर कोई गरीब आदमी न आए उन्होंने कहा कि बड़ा आदमी वह नहीं कि उसके बड़े ठाठ हों बड़ा आदमी तो वह है जिसके पास आने बाला कोई अपने आपको छोटा महसूस न करे। 

       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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