ऐसी पाठशाला होनी चाहिए जिसमें झुकना सिखाया जाए जब मृदुता आती है तब मार्दव धर्म आता है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

धर्म

ऐसी पाठशाला होनी चाहिए जिसमें झुकना सिखाया जाए जब मृदुता आती है तब मार्दव धर्म आता है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

              रामगंजमंडी 

दसलक्षण पर्व का द्वितीय दिवस उत्तम मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया एवम उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की गई। 

 

 

    आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि जब मृदुता आती है तब मार्दव धर्म आता है यह धर्म कहता है झुकना चाहिए उन्होंने कहा ऐसी पाठशाला होनी चाहिए जिसमें झुकना सिखाया जाए। जैन दर्शन के विषय कहा कि झुकना ही धर्म है झुकेंगे नहीं तो मार्दव को प्रकट नहीं कर सकते।

 

 

       जीवन में अहंकार के कारण मार्दव धर्म को खत्म करते जा रहे है

आचार्य श्री ने कहा हर परिस्थिति में झुकने का भाव आना चाहिए मान सम्मान बढ़ जाता है तो अहंकार बढ़ जाता है चार व्यक्ति हमें पूछ लेते हैं तो लगता है कि हम बड़े हो गए हैं हमने अपने आप को बड़ा समझ लिया है यदि अपने आप को बड़ा समझोगे तो छोटों को नहीं समझोगे मकान बनते जा रहे हैं वैसे वैसे हम अहंकार के शिखर पर चढ़ते जा रहे हैं। हम अपने जीवन को अगर देखे तो अहंकार को बढ़ाते चले जाते हैं और मार्दव धर्म को खत्म करते चले जाते हैं।

 

   जितना भी अहंकार है दिखावे में स्पष्ट दिखाई देता है किसको दिखाना चाहते हो दिखाओ मत अपने से बड़ों को देखो तो झुकने का भाव आएगा क्योंकि बड़ों को देखोगे तो लगेगा कि मुझसे बड़े बहुत हैं अहंकार मरते मरते तक नहीं जाता झुकना सीखो पहले दरवाजे छोटे होते थे जैसे ही अकड़ कर चले तो सर में लग जाती थी। अहंकार की महिमा यह है कि आदमी घटता जा रहा है इसलिए दरवाजे बड़े होते जा रहे हैं

 

 

 

उन्होंने कहा जिसे परीक्षा देना नहीं आता उसे पढ़ना भी नहीं आता लिखना भी नहीं आता यदि हमें परीक्षा देना आता है तो नियम संयम लेना अभी आता है। चाहे तो बहुत कुछ कर सकते हैं अहंकार दूर करके दूसरों को समझोगे तो बहुत कुछ होगा आत्मा की शक्ति असीम है लेकिन हम अहंकार के कारण कुछ समझते नहीं।

 

 

 

सर को झुकाया लेकिन मन को नहीं झुकाया तो मार्दव धर्म नहीं आएगा मार्दव धर्म कहता है मन से झुके मन में सरलता लाए मान महाविषरूप होता है दुर्योधन का उदाहरण देते हुए कहा कि उसे अहंकार की बीमारी थी। 

 

    अहंकार से परिवार टूट जाते हैं बैर हो जाते हैं इतना तक हो जाता है व्यक्ति प्राण लेने तक को तैयार हो जाता है अपने आप को समझो समझने की जरूरत है हम अपने को समझ जाते हैं तो दूसरे को समझ जाते हैं।

   अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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