जिनमें आत्मा धर्म से जुड़ती है नैतिकता से जुड़ती है, कर्तव्यों से जुड़ती है, समीचीन क्रियाओ से जुड़ती है वह पर्व कहलाता है।  आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

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जिनमें आत्मा धर्म से जुड़ती है नैतिकता से जुड़ती है, कर्तव्यों से जुड़ती है, समीचीन क्रियाओ से जुड़ती है वह पर्व कहलाता है।  आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज 

रामगंजमंडी 

परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए पर्व का महत्व बताया उन्होंने कहा हमे मन की सफाई करना चाहिए। मन में जो कुछ अशुभ विकल्प है उन्हें निकालना चाहिए। उन्होंने कहा जैन दर्शन कहता है कि सुधार घर की रसोई से शुरू होता है। आचार्य श्री ने कहा भूखे रहने के लिए पर्व नहीं होता पर्व धर्म से जुडने के लिए होता है एकासन एक समय भोजन इसलिए किया जाता है की आरंभ सारंभ से दूर रहकर धर्म से जुड़ा जाए। 

 

 

      उन्होंने कहा कितने भी वैज्ञानिक आविष्कार कर ले कितनी भी आधुनिकता इस संसार में छा जाए कितनी भी भौतिकवाद सुविधाए आपको मिल जाए यह हमे धर्म अलग नहीं कर सकती हम पर्वों पर ध्यान दें पर्वों को बनाने के तरीकों पर ध्यान दें। धर्म से जुड़ने के लिए पर्व मनाए तो कोई भी ताकत आपको धर्म से दूर नहीं कर सकती।

 

       जिनमें आत्मा धर्म से जुड़ती है नैतिकता से जुड़ती है, कर्तव्यों से जुड़ती है, समीचीन क्रियाओ से जुड़ती है वह पर्व कहलाता है। आचार्य श्री ने कहा नैतिकता बहुत बड़ी चीज होती है कि नित्य नियम में हम क्या कर रहे हैं। आपकी दिनचर्या में यदि प्रतिदिन धर्म है तो हर दिन आपके लिए पर्व है। 365 दिन आपके लिए पर्व हो सकते हैं। अच्छा सोचना,अच्छा बोलना, अच्छा करना 365 दिन आप विशुद्धी बढ़ाए तो इन पर्वों की आपको जरूरत ही नहीं पड़ेग

उन्होंने कहा सफाई करे रसोई की और मन की हमारी संस्कृति है हमारे संस्कार हैं उन्होंने कहा घर ऐसा होना चाहिए कभी भी दिगंबर आपके घर में आ जाए उन्होंने कहा पर्व के पहले यह भूमिका बनानी चाहिए कि रसोई की सफाई और मन की सफाई हो।

 

यह पर्व मनोरंजन के दिन नहीं आ रहे हैं यह पर्व साधना के तपस्या के दिन आ रहे हैं जरूरी नहीं है कि आप उपवास करके तपस्या करें अच्छा सोचे, अच्छा बोले, अच्छा करे तो इस पंचम काल में बड़ी तपस्या है।

 

आप यह प्रतिज्ञा कर ले बुरा ना सोचेंगे, बुरा ना बोलेंगे और बुरा न करेंगे उपवास जरूरी नहीं है संस्कार और संस्कृति का पालन करना जरूरी है।

 

यह पालन आप सब सही तरीके से कर ले तो आप पर्व मना रहे है या आप पर्व मनाने के लिए तैयार हैं। यदि हम चिंतन करते रहते हैं तो अशुभ से हमारा विकल्प छूट सकता है। ग्रहण करने वाला चिंतन नहीं छोड़ने वाला चिंतन करना है।

   आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज के आहारचर्या एवम चरण वंदना का सौभाग्य श्रीमान कमल कुमार रजत लुहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ 

     अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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