श्रद्धा से शक्ती स्वयं ही आ जाती है : जयंत सागर जी महाराज
नांद्रे (महाराष्ट्र ) :21 -8-2025अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि,पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी १००८ भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नांद्रे में विराजमान हैं |
विशुद्ध गुरू के शिष्य युवा हृदय सम्राट मुनि श्री जयंत सागर महाराज जी ने नांद्रे में अपने प्रवचन में कहा कि – धर्म के प्रति श्रद्धा है तो स्वतः ही अंदर में शक्ती आ जाती है | जहाँ और जिससे व्यक्ती को प्रीती होती है तो व्यक्ती कितना भी अस्वस्थ हो, परंतु कोई उसका करीबी आ जायें तो व्यक्ति जिसको बिस्तर से उठने की ताकत नहीं थी परंतु प्रिय मित्र के आने पर उसको शक्ति स्वतः ही आ जाती है और जहाँ श्रद्धा होती है वहाँ किसी को कोई कार्य करने को कहना नहीं पडता | वह कार्य करने का और धर्म करने की स्वयं ही इच्छा होने लगती है | इसलिए जीवन में श्रद्धा बढ़ाओ, प्रीती बढ़ाओ,जहाँ प्रीती- प्रेम होता है वहाँ सब आपके बन जाते है | हर जगह सम्मान मिलता है | आदर मिलता है | जिनके अंदर श्रद्धा,आस्था,स्नेह,प्रेम,प्रीती, नहीं होती उनका संसार बहुत न्यून ही होता है |
संसार में उसका कोई आदर सन्मान नहीं करता | और फिर ऐसे व्यक्ति को जीवन की इच्छा ही नहीं होती | इसलिए जीवन में श्रद्धा है, आस्था है, प्रीती है तो हमें कभी किसी के सामने कुछ कहने की आवश्यकता नहीं होती | अपने अंदर शक्ती स्वयं ही आ जाती है |
श्री अभिषेक अशोक पाटील
(कार्याध्यक्ष – अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद,कोल्हापूर) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
