भौतिकवादी वस्तुओं से सच्चे सुख की अनुभूति नहीं सुप्रभसागर महाराज
बूंदी देवपुरा
संभवनाथ दिगंबर जैन मंदिर देवपुरा बूंदी में रविवार को धर्म सभा में मुनिश्री 108वेराग्य सागर महाराज व मुनिश्री 108सुप्रभसागर महाराज के सानिध्य में दस लक्षण महा पर्व पर द्वितीय विद्यावर्धन श्रावक संस्कार शिविर के फोल्डर का विमोचन किया गया।
शांति सिंधु प्रभावना पावन वर्षा योग समिति के अध्यक्ष पदम बरमूडा व संयोजक कमल कोटिया ने संयुक्त रूप से बताया कि यह संस्कार शिविर 28 अगस्त से 6 सितंबर 2025 तक शांति सागर सभा भवन मंडप में श्री दिगंबर जैन बघेरवाल छात्रावास देवपुरा बूंदी में आयोजित होगा।

वर्षा योग समिति के उपसंयोजक सुरेश कोटिया व कोषाध्यक्ष जम्बू कुमार धानोतिया ने बताया कि इस शिविर में लगभग 150 शिवराथीयो की आने की संभावना है।
वर्षा योग समिति के मंत्री दिनेश बोरखंडिया व शिविर प्रभारी अजीत कोटिया ने बताया कि सभी शिवराथीयों के ठहरने व भोजन व्यवस्था शिविर में ही होगी।

वर्षा योग समिति के उपाध्यक्ष गजेंद्र हरसोरा व सूचना प्रभारी नरोत्तम ठगने बताया कि इस शिविर में शिवराथीयों को पुरुष वर्ग धोती दुपट्टा व महिलाएं हल्के रंग की साड़ी में रहेगी। इस अवसर पर देवपुरा शक्ल जैन समाज के अध्यक्ष विनोद कोटिया मंत्री ओमप्रकाश कोषाध्यक्ष अशोक धानोतया उपकोषाध्यक्ष महावीर कोटिया बूंदी बघेरवाल प्रांत के अध्यक्ष महावीर धनोपया सकल जैन समाज के संरक्षक ओमप्रकाश जैन तरुण सावला नरेंद्र कोटिया प्रेमचंद ठोला देवेंद्र हरसोरा सहित शिविर प्रभारी उपस्थित थे।

इससे पूर्व धर्म सभा में मुनिश्री 108सुप्रभसागर सागर महाराज ने द्रव्य संग्रह के स्वाध्याय की अंतर्गत पुदगल(द्रव्य संग्रह) गाथा पर प्रवचन देते हुए कहा कि मनुष्य को जीवन में जो दिख रहा है उसी का नाम पुदगल है। 
महाराज श्री ने कहा कि द्रव्य क्षेत्र काल के प्रभाव से एक ही वस्तु का हमें भिन्न-भिन्न अनुभव होता है महाराज श्री ने पानी का उदाहरण देते हुए बताया कि क्षेत्रकाल के बदलते ही पानी का स्वभाव बदलता है उसी प्रकार कुछ गलती अपना स्वभाव बदलता है।
मुनि श्री ने कहा कि मनुष्य अपनी सुंदरता को दिखाने के लिए क्रीम पाउडर सेंट शैंपू का प्रयोग कर अच्छा बनने का प्रयास करता है लेकिन वह अपनी अंतर आत्मा की शुद्धता व सुंदरता के लिए नहीं सोचता लेकिन मनुष्य का यह सब दिखावा कुछ समय के लिए रहता है समय की मार से सारे आकर्षण पीछे छूट जाते हैं।
महाराज श्री ने प्रवचन में कहा कि मनुष्य आज के समय में पुदगल रूपी द्रव्य को देखकर प्रशंसा करते हैं जबकि पुदगल रूपी द्रव्य का स्वभाव है गलना गलकर दूसरे दिन नया बन जाना जिस प्रकार फटे गले कपड़े को छोड़ने में दुख नहीं होता इस प्रकार क्षीण हुए शरीर को छोड़ने से दुख नहीं किया जाता आत्मा एक शरीर को छोड़कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है।
मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि सांसारिक प्राणियों ने पुदगल की क्रियाओ को स्वयं ने बांध रखा है इसके कारण बाहय सुख-दुख का अनुभव कर रहे हैं पुदगल की
क्रियाओ को छोड़ने का पुरुषार्थ स्वयं को करना होगा। जबकि आत्मा का स्वभाव अलग है वास्तविक सुख का अनुभव पुदगल के सुख से अलग है। आज का मनुष्य पुदगल के स्वाद में उलझा हुआ है जबकि सच्चा सुख आत्मा के स्वाद में है।
धर्म सभा में मुनिश्री 108वैराग्य सागर महाराज ने कहा कि धन का दान करने वाले व्यक्ति को निरोगी काया मिलती है तथा शांति की अनुभूति करता है।
धर्म सभा में मंगलाचरण सीमा कोटिया ने किया भगवान के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन ओमप्रकाश बड़जात्या दिनेश बोरखंडिया ने किया महाराज श्री के कर कमलों में शास्त्र भेंट नीमच से आए धर्मालंबियों ने किया धर्म सभा का संचालन पंडित देवेंद्र जैन ने किया।
रवींद्र जैन काला बूंदी से प्राप्त जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
