जीवन में जो कुछ भी घट रहा है,उसे स्वीकार करो- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

जीवन में जो कुछ भी घट रहा है,उसे स्वीकार करो- मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज 

भोपाल (अवधपुरी) जीवन में अच्छा-बुरा, प्रतिकूल-अनूकूल, संयोग- वियोग, है हानि-लाभ जो भी घट रहा है,उसे दिल से स्वीकार करो” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने अवधपुरी में प्रातःप्रवचन सभा में व्यक्त किये।

 

 

 

 मुनि श्री ने कहा कि जब भी कोई घटना घटती है,तो उसमें स्वीकृति और अस्वीकृति का भाव ही हमें दुखी बनाती है” आजकल तो लोग वाटसएप फेसबुक की बातों पर ही अपनी टिप्पणी देकर अपने आपको सुखी या दुःखी समझने लगते है” मुनि श्री ने स्वीकार-सत्कार- प्रतिकारऔर बहिष्कार शब्द की व्याख्या करते हुये कहा कि आप लोगों के साथ जब कुछ अघट घटता है,तो सामने वाले के खिलाफ अपशव्द बोलना शुरु कर देते हो गुरुदेव ने एक हायकू लिखा है “जिनसे मेरे कर्म कटे वे मेरे शत्रु कैसे”अपशब्दों को बोलने वाला मेरा शत्रु नहीं वह तो अपने अंदर के गुबार निकाल रहा है,उसके अंदर का गुबार निकल रहा है और मेरे अंदर का बुखार उतर रहा है” जब ऐसी आध्यात्मिक सोच मनुष्य के मन में जग जाए, तो वह कभी दुःखी नहीं हो सकता उन्होंने कहा कि जीवन में यदि कुछ नया करना चाहते हो तो अपने अंतरंग में भावनात्मक संतुलन को बनाइये और यह शक्ति भावनायोग के माध्यम से मिलती है जो आपके अंदर आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करती है “यदि कोई आपके विरुद्ध बात कर रहा है तो उसका भी तो सत्कार करो” कुछ लोग वाट्सएप इंस्टाग्राम पर अनर्गल बात को लिख रहे है तो मुझसे कहा कि महाराज जी हम लोगों को इसका प्रतिकार करना चाहिये इससे अपनी छवि खराब होती है तो हमने जबाब दिया कि उन्होंने अगर मेरी छवि बनाई होगी तो वह मेरी छवि खराब करेंगे, जिसे तुम मेरी छवि मान रहे हो वह मेरी छवि नहीं यह तो एक काल्पनिक छवि है जो इस काल्पनिक छवि को अपना मानते है तो वह पूरी जिंदगी दुःखी रहते है

 

 

 

, ये नाम रुप मेरी असली छवि नहीं मेरी असली छवि तो मेरे भीतर है जो कि अनाम अरुप अजर अमर अविनाशी है मैं उस छवि को पहचानता हूं, उसको ना कोई बना सकता है और न बिगाड़ सकता है वह शाश्वत अजर अमर है” जिसके अंदर यह आध्यात्म प्रकट हो जाता है वह कभी बाहर की बातों से विचलित नहीं होता ।

मुनि श्री ने कहा कि आज के समय में धर्मी लोगों को आत्मज्ञान की सबसे ज्यादा जरुरत है, मात्र किताबी ज्ञान आत्मज्ञान नहीं हे,अपने दोष और दुर्बलताओं को स्वीकार करने वाला ही आत्मज्ञान को प्राप्त कर सकता है जिस दिन अंतरात्मा को पहचान लिया तो जीवन की जो मस्ती है वह अदभुत होगी, अपने दोषों का प्रतिकार करो और दूसरे के गुणों का सत्कार करो और अपने दुर्गुणों का बहिष्कार करो।

उपरोक्त जानकारी देते हुये प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 15 अगस्त से 24 अगस्त तक प्रातः8:30 से 9:30 बजे तक विशेष प्रवचन माला शुरु हो रही है सभी महानुभाव इसका विशेष लाभ लें।

      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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