भावनायें हमारे अंदर ऊर्जा जगाती है,उस ऊर्जा के संचार से हमारी चेतना का परिष्कार होता है” -मुनि श्री प्रमाण सागर

धर्म

“भावनायें हमारे अंदर ऊर्जा जगाती है,उस ऊर्जा के संचार से हमारी चेतना का परिष्कार होता है” -मुनि श्री प्रमाण सागर

भोपाल (अवधपुरी) “

भावनायोग” आत्मा या आध्यात्मिकता के अमूर्त पहलुओं तक ही सीमित नहीं है, यह शरीर-मन-और मस्तिष्क इन तीनों स्तरों पर एक साथ समग्र रुप से कार्य करता है, उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “भावनायोग का विज्ञान” के शोध और प्रबंधों के साथ चर्चा करते हुये व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भावनाओं का प्रभाव बच्चों पर तो पड़ता ही है, साथ ही पेड़ पौधों पर भी पड़ता है।उन्होंने कहा कि अपने बचपन को याद कीजिये जब आप गिर जाते थे तो मां क्या कहती थी अरे अरे कोई बात नहीं घोड़ा कूदा… और देखो तो ये चींटी मर गई और आपका मन उस चोट से हट जाता था और रोने के स्थान पर हंस पड़ते थे।

 

 

 

मुनि श्री ने दूसरा उदाहरण मां बच्चे को दूध पिला रही बच्चा मां को तंग करता है और दूध नहीं पीता तो कभी उसे डराकर,फुसलाकर चिकोटी काटकर दूध को पिलाती है बच्चा भी मां के इमोशंस को समझता है उन्होंने कहा कि भावनाओं का प्रभाव पेड़ पोधो पर भी परिलक्षित होता दिखाई दिया बगीचे में माली को आया देखकर फूल खिल उठते है डालियां झूम उठती है वही एक व्यक्ति के मन में फूल तोड़ने का भाव आया अभी उसने तोड़ा नहीं है लेकिन जो पोलीग्राफ टेस्ट किया गया उसमें नेगेटिव वाईव्रेशन दिखाई दिये मुनि श्री ने कहा कि में केवल ग्रंथों और शास्त्रों को पड़ता ही नहीं हुं उस पर मंथन करता हूं और यथा संभव प्रयोग भी करता हूं। उन्होंने 2008 का निजी उदाहरण देते हुये कहा कि मेरे एक हाथ की नस सूख गई थी यहा तक कि उस हाथ से पिच्छी तक उठाते नहीं बनती थी ऊर्जा प्रवाह भावनायोग का सहारा लिया और वह सुखी हुई नस फिर से ठीक हो गई।

 

 

 मुनि श्री ने कहा कि उस समय तो भावनायोग का इतना प्रचार प्रसार भी नहीं था लेकिन मेंने जो शास्त्रों का अध्यन किया और उससे जाना कि ब्रहमांड से सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से हम अपनी शारीरिक बीमारियों को भी ठीक कर सकते है।मुनि श्री ने कहा कि हम अपने मस्तिष्क में जैसी धारणा बनाते है वैसा सब कुछ हमारे अंदर घटित होंने लगता है कल्पना भी यथार्थ बन जाती है और बहुत बड़ा व्यापक परिवर्तन नजर आता है। भावनायोग का असर केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता मानसिक भावनात्मक और आध्यात्मिक चारों स्तर पर पड़ता है अच्छी भावना से अच्छे रसायन बन जाते है और हमारी इम्यूनिटी बढ़ जाती है।

 

 

 

प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया मध्यकाल में भोपाल के महिलामंडलों की बैठक मुनि श्री के सानिध्य में हुई जिसमें महिलाओं को भावनायोग करने तथा परिवार को सुचारु रुप से चलाने के लिये अपनी और से टिप्स दिये।

          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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