समझदार लोग न बुराई करते हैं न बुराई सुनते हैं जिस प्रकार गाड़ी से धुआं पीछे से निकलता है इस प्रकार बुराई करने वाले लोग हमेशा पीछे रह जाते हैं आदित्य सागर महाराज
मिश्रौली
परम पूज्य श्रुत संवेगी मुनि श्री आदित्य सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए दूसरों की बुराई न करने की सीख देते हुए अपने मंगल प्रवचन में कहा कि अज्ञानी की संपत्ति इंद्रिय सुख में लगती है जबकि ज्ञानी व्यक्ति की संपत्ति भगवान की आराधना में लगती है।
महाराज श्री ने कहा समझदार लोग ना बुराई करते हैं ना बुराई सुनते हैं।जिस प्रकार गाड़ी से धुआं पीछेसे निकलता है उसी प्रकार बुराई करने वाले लोग हमेशा पीछे हीरह जाते हैं। सुधार हमेशा स्वयंसे प्रारंभ होता है। बुराई एक ऐसा कार्य है जो हमारी नींव खराबकर देता है। समझदार व्यक्ति सभी की राह में दीपक जलाताहै, लेकिन स्वयं किसी से जलता नहीं है, स्वयं प्रसन्न रहते हैं वदूसरों को प्रसन्न रखते हैं। प्रकृति इनका साथ देती है, हम जीवनकी परिस्थितियों को कभी नहीं बदल सकते मन स्थिति को बदलना आवश्यक है।

डिग्री से नहीं मतलब ज्ञान से होना चाहिए।
ज्ञान से ही प्रसन्नता आती है। सबसे कीमती श्रद्धानहै, श्रद्धा विशुद्धि से आती है।हमें जिससे काम होता हैं, हमेंकेवल उसी से श्रद्धा होती है।गुरुओं के प्रति विनय भाव से ही ज्ञान प्राप्त किया सकता है। श्रद्धा बेची नहीं जाती वह केवल होती है। उसे बनाएरखना हमारा कर्तव्य है।

दर्शन से जो विशुद्धि आती वह सम्यक दर्शन की औरजाती है। उन्होंने कहा जीवो के लिए दान देना अभयदान है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
