विज्ञान की निष्पत्तियां तो बदल सकती है लेकिन धर्म की अवधारणा कभी नहीं बदल सकती प्रमाण सागर महाराज 

धर्म

विज्ञान की निष्पत्तियां तो बदल सकती है लेकिन धर्म की अवधारणा कभी नहीं बदल सकती प्रमाण सागर महाराज 

 भोपाल अवधपुरी

विज्ञान और धर्म दौनों में बड़ी समानता है,लेकिन दोनों में एक मौलिकअंतर भी है जहा विज्ञान बाहरी जगत की बात करता है, वही धर्म अंतर जगत की बात करता है,विज्ञान की निष्पत्तियां प्रयोग के आधार पर होती है,तो धर्म की अवधारणा अनुभव के आधार पर होती है, विज्ञान की निष्पत्तियां बदल सकती है लेकिन धर्म की अवधारणा कभी नहीं बदलती।

 

 

 उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातःकालीन धर्म सभा में व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि अनुभव प्रयोग की अवस्था है उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि जैसे गुड़ को खाने से मूंह मीठा होता है,लेकिन विज्ञान तथ्यात्मक कसौटी पर चलता है? वह कहता है मुंह मीठा हुआ तो क्यों हुआ?इसमें इतने सारे तथ्य मौजूद है इसलिये मीठा हुआ।मुनि श्री ने कहा कि कुछ लोग गुड़ के खाने का आनंद लेते है तथा कुछ लोग है जो गुड़ बाद में खाते है पहले उसका पोस्टमार्टम कर देते है,और उसआनंद से वंचित हो जाते है,उन्होंने कहा कि आप लोग तो भावनायोग काआनंद लो आम खाओ पेड़ मत गिनो? “भावनायोग”तर्क की कसौटी पर भी खरा उतरा है। बाहरी जगत के विज्ञान में भटकाव हो सकता है, लेकिन अंतर जगत की इस यात्रा में भावनायोग खरा उतरा है।

 

 

 मुनि श्री ने अपने अनुभव को बताते हुये कहा कि “भावनायोग” का डिजाइन-प्रार्थना, प्रतिक्रमण,प्रत्यख्यान तथा सामायिक की गहराई में उतरकर जो मेंने अनुभव प्राप्त किया है, उसी को मै आप लोगों के समक्ष प्रस्तुत कर प्रफुल्लित महसूस कर रहा हूं। मुनि श्री ने कहा

 “भावनायोग” के चार चरण प्रार्थना,प्रतिक्रमण,प्रत्याख्यान सामायिक” सारे जगत की मजबूती का आधार बन सकते है” जब हम इसे समन्वित इकाई के रूप में देखते है तो भावनायोग की पूरी प्रक्रिया तथा गहराई स्पष्ट रुप से समझने आने लगती है। उन्होंने न्यूरोसाइंस की बात करते हुये कहा कि हमारा मस्तिष्क हमारा सी.ई.ओ. है जिससे संपूर्ण शरीर नियंत्रित होता है, उन्होंने कहा कि “भावनायोग” करने से भय चिंता क्रोध चिड़चिड़ापन और सभी नकारात्मकता दूर होकर “समता,शांति और आत्म जागरूकता की स्थिति में स्थित होकर आत्मा के सहज स्वभाव का अनुभव होता है, यही हमारे सामायिक की प्रक्रिया है।

 

मुनि श्री ने कहा हमारा मस्तिष्क जैसी धारणा बन जाती है उसी अनुसार हमारा क्रम शुरु हो जाता है। मुनि श्री ने कहा कि “भावनायोग” कोई कपोल कल्पित बात नहीं यह वीतराग विज्ञान का सिद्ध प्रयोग है जिस पर विज्ञान ने अपनी मोहर लगा दी।इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन बा.ब्र. अशोक भैयाजी ने किया। मुनिसंघ के प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कार्यक्रम का शुभारंभ आचार्य श्री के चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्जवलन से हुआ तत्पश्चात प्रसिद्ध न्यूरोलॉजी के डा. सुभाष जखेरिया एवं डा. सचिन जैन ने मानसिक एवं शरीर विज्ञान के माध्यम से “भावनायोग”के वैज्ञानिक प्रभाव को तर्क सहित रखा।

 

 

 प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया 2 अगस्त को दौपहर 2 बजे से महिला महा समिति भोपाल के तत्वावधान में भोपाल के सभी महिला मंडलों का सम्मेलन अवधपुरी में मुनिसंघ के सानिध्य में रखा गया है। विद्या प्रमाण गुरुकुलम् तथा गुणायतन के सभी पदाधिकारिओं एवं सकल जैन समाज ने सभी महिलामंडलों से अवधपुरी में पधारने का निवेदन किया।

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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