समय समझदारों से कहता है कि जिस दिन तुम मुझे खो दोगे – उस दिन,,मुस्कुराते हुये भी रो दोगे..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी
दिल्ली
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि समय समझदारों से कहता है कि जिस दिन तुम मुझे खो दोगे – उस दिन,,मुस्कुराते हुये भी रो दोगे।
सच में -जीवन का आनंद तो वर्तमान में है। पीछे का जिक्र नहीं, आगे की फिक्र नहीं, बस यही जीवन शैली है। मैं भक्तो से कहता हूँ – जो मिले उसे बगैर नाज-नखरे के स्वीकार कर लो। फिर वह निन्दा हो या प्रशन्सा,, सुख हो या दुःख,, गीत हो या गाली,, प्रेम हो या घृणा,, शुभकामनाएँ हो या अशुभ कामनाएं। जो भी हो झोली में डालो और आगे बढ़ते जाओ।
उन्होंने कहा लेकिन आदमी बड़ा बेईमान है। सुख, आनंद, प्रेम, प्रसन्न्ता और प्रशन्सा की मिठाई को प्रसाद समझकर स्वीकार कर लेता है,, लेकिन निन्दा, बुराई, अपमान का गोबर उसे हजम नहीं होता। गाली को सुनकर वह अपना नाक मुँह बिगाड़ता है।
लेकिन मैं सोचता हूँ – इसकी कोई जरूरत नहीं है। कोई तुम्हें गाली दे, अपशब्द बोले, अपमान करे,, तुम उसे स्वीकार ही मत करो। स्वीकार करना कोई तुम्हारी मजबूरी नहीं है ना।
समय ने आदमी से कहा मैं इतना काबिल तो नहीं हूँ कि कोई अपना समझे,, पर इतना जरूर यकीन है मुझे – जो मुझे खोयेगा, वो ज़िन्दगी भर अफसोस करेगा कि अच्छा समय था, हम सद् उपयोग नही कर पाये।

जीवन का कड़वा सच ~ इस दुनिया में सब कुछ कीमती है,, मगर पाने से पहले और खोने के बाद…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

