वर्तमान में सबसे बड़ा शत्रु व्यक्ति के लिए व्यक्ति का अहंकार है आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि हम दूसरे को देखकर संतुष्ट नहीं होते हैं यह हमारा जन्म सिद्ध अधिकार हो गया है। हम दुसरे को देख ही नहीं पाते हैं हमारा धर्म कहता है मैत्री भाव और गुणीजनों को देखकर प्रेम उमड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा वर्तमान में व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु अहंकार है। 99 प्रतिशत झगड़े वर्तमान में अहंकार के कारण होते है। अगर एक व्यक्ति चुप हो जाता है अपने आपको सरल करता है, अहंकार को कम करता है तो झगड़ा तीन काल में भी संभव नहीं होगा। अहंकार इसलिए आता है क्योंकि कषाये अशुभ है ये बढ़ती जा रही है परिणाम ऐसे आ जाते हैं जो हम सोच ही नहीं सकते।

नीला वर्ण साधु परमेष्ठि का प्रतीक है
आचार्य श्री ने अपने प्रवचन में नीले वर्ण के बारे भी बताया उन्होंने कहा
नीले वर्ण को दो भागों में बाटा गया है एक शुभ सूचक दूसरा अशुभ सूचक ध्वज में नीचे रंग नीला रंग होता है साधु परमेष्ठि का प्रतीक है क्योंकि साधु परमेष्ठि में जब वर्ण का ध्यान किया जाता है तो नीले वर्ण का किया जाता है। भगवान मुनिसुव्रत नाथ नेमीनाथ भगवान नीले वर्ण के शुभ है जब इस पर रंग घटाया गया व्यक्तित्व पर और व्यक्तित्व के कारण रंग शुभ हो गया है। घटाया गया शुभ व्यक्तित्व पर तो शुभ और अशुभ पर घटाया जाएगा तो अशुभ होगा। वर्ण विज्ञान भावों की विकृति करता है। वर्ण विज्ञान कहता है वर्णों का प्रभाव आत्मा पर गहराई से पड़ता है वास्तु भी कहता है पक्के वर्ण नहीं होना चाहिए यहां यह कलर और पेंट नहीं होना चाहिए था ऐसा इसलिए क्योंकि रंगों का प्रभाव पड़ता है l जब इनका प्रभाव पड़ता है तो जीवन भी अस्त व्यस्त होता है इस बात का भी ध्यान रखना कोई भी रंग का वस्त्र पसंद आ गया ले लिया नहीं जो आपके भावों को अनुकुलता देता है ऐसे वस्त्र पहनो। यदि पसंद से पहनोगे तो काम गड़बड़ होगा। कोई भी वस्तु कोई भी चीज आप रखते है तो उस वर्ण के हिसाब से कुछ मात्र में आपको ठीक रख सकता है। मनचाहे वर्णों में मनचाहे रंगों में आप रहते है तो जो चांस आपके अच्छे होने के थे वे समाप्त हो जाते हैं। 
नील लेश्या के विषय में समझाते हुए गुरुदेव ने बताया की आलस प्रमाद की प्रगाढ़ता होती है नील लेश्या वाले व्यक्ति की आत्मा पर प्रमाद और आलस हावी होता है। हमेशा स्फूर्ति रखना कोई प्रमाद नहीं करना इस बात को हमेशा करना जो कर्तव्य है उसे में करूंगा। और जो मेरा धर्म है उसे मैं करूंगा।
उन्होंने कहा रिश्ते को आप कैसे निर्वाह करते है। कैसे निभाते हो उसी से आपके व्यक्तित्व और कृतित्व का पता चलता है। उसी से पता चलता है की आपके भाव शुभ है या अशुभ है। उन्होंने कहा मैं किसी को नहीं जानता हूं और मैं चाहता हूं चार महीने मेरा किसी से परिचय न हो। सिर्फ इतना परिचय हो मैं धर्मात्मा हु आप धर्मात्मा हो बस इतना ही परिचय हो। यही परिचय दुनिया का सबसे बड़ा परिचय है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312






