अहंकार किसी को नहीं छोड़ता, जीवन मेंअहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए सुधासागर महाराज 

धर्म

अहंकार किसी को नहीं छोड़ता, जीवन मेंअहंकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए सुधासागर महाराज 

अशोकनगर दुष्ट और अहंकारी जब अपने अहम को पुष्ट कर बाहर आते हैं, तभी उनका विनाश होताहै। उन्होंने श्रीकृष्ण और कन्हैया की कथा का उदाहरण देते हुए कहा कि जब नन्हा कन्हैया दुष्ट नागराज से भिड़ता है, तब मां यशोदाघबरा जाती हैं। तब कान्हा उन्हें अपनी नारायणी शक्ति दिखाते हैं और कहते हैं कि मुझे मानव बनकर जीने दो, अहंकारियों को बाहर आने दो, तभी उनका अंत होगा।

 

 

 

महापुरुषों को धैर्य रखना पड़ता है। श्रीकृष्ण अर्जुन को भी यही सिखाते हैं। जयद्रथ जब अहंकार में बाहर आता है, तब श्रीकृष्ण सूर्यशेष के ऊपर से बादल हटा देते हैं। अहंकार किसी को नहीं छोड़ता। जीवन में अहंकार औरकर ममकार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

 

 उक्त धर्म उपदेश सुभाषगंज मैदान में  धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव श्रीसुधासागर जी महाराज ने कहे। मुनिश्री ने कहा कि भगवान हमें वह दिखा रहे हैं जिसकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि अपनी आंख से आंख देखो, जो दिखेगा वही सत्य होगा। अगर आंखें हमारे काम की नहीं,तो उनका कोई उपयोग नहीं। उन्होंने कहा किहम चाहते हैं कि प्रकृति, हवाएं, देश और परिवार हमारे अनुकूल हों, लेकिन जब हमारी आंखें ही हमारे अनुसार नहीं चल रहीं, तो दुनिया कैसे चलेगी। मन हमारा है, फिर भी भटक रहा है। अगर बाजार में भटकते तो कोई राह दिखा देता, लेकिन जब अपने कमरे में ही भटक रहे हैं, तो कोई रास्ता नहीं दिखा सकता।

 

 

मन की तरंग को साध लो, वही भजन है। जिस दिन मन आपके अनुसार चलने लगे, समझ लेना कि आपने विजय पा ली है। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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