उग्रता”ऐसी आग है,जो हमें भीतर से भस्म कर देती है प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
उग्रता”ऐसी आग है,जो हमें भीतर से भस्म कर देती है,जब व्यक्ती के चित्त में “उग्रता”हांवी होती है,तो वह सबसे पहले हमारी समरसता और हमारे संबंधों को बिगाड़ती है” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने “उग्रता” के परिणाम पर विचार प्रकट किये।
मुनि श्री ने कहा कि क्रोध के आवेग में जब व्यक्तीअपना आपा खोता है,तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है,उसके निर्णय लेंने की क्षमता प्रायः क्षींण हो जाती है, उसके सभी निर्णय गलत होते है वह मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है”
मुनि श्री ने उग्रता के कारण- लक्षण- परिणाम एवं उग्रता से बचने के उपाय पर चर्चा करते हुये कहा कि जब तक बीमारी को नहीं पहचानोगे तो उसका निवारण कैसे होगा? उन्होंने अहंकार और असहिष्णुता जब व्यक्ती पर हावी होती है तो उससे पूछे बिना यदि कोई कार्य हो जाता है तो वह व्यक्ती भड़क उठता है उसके अंदर से सहनशीलता समाप्त हो जाती है वह हर बात को उल्टे अर्थ में लेकर अपने निर्णय को ही सही बताता है।
मुनि श्री ने कहा कि हो सकता है कि आप सही हो लेकिन अपनी बात को ही सही ठहराना उस पर अड़ जाना आपकी उग्रता को दर्शाता है और उसका परिणाम पश्चाताप से समाप्त होता है।उन्होंने कहा कि अहंकारी कहता कि जो “मेरा सो सही” और विनम्र कहता “सही सो मेरा” मुनि श्री ने कहा कि यदि धैर्य के साथ यदि मनुष्य इस बात को समझ ले तो जीवन में कभी भी कोई अप्रत्याशित घटना ही न घटे और जीवन सुनहरा हो जाये। मुनि श्री ने कहा कि अहंकारी चीजों को थोपता है और विनम्र चीजों को समझता है उन्होंने कहा कि यह बीमारी बड़े तो बड़े बच्चों में भी होंने लगी है बच्चों की अपेक्षा की पूर्ति न होंने पर वह भी चीजों को तोड़ने लगते है तथा अपना आक्रोश जताते है मुनि श्री ने जीवन की सच्चाई बताते हुये कहा कि यदि आप इन सबसे बचना चाहते हो तो छोटी छोटी बातों में तीव्र प्रतिक्रिया देना बंद करो जो व्यक्ती उग्रता के साथ तीखी और नकारात्मक प्रतिक्रिया देते है,वह अपने विचारों से,अपनी वाणी से आग उगलते है ऐसे व्यक्ति की अपेक्षा की पूर्ति न होंने पर वह तुरंत ही ऐसे फट पड़ते जैसे कंही ज्वलामुखी फूट पड़ा हो और अच्छे खासे माहौल को खराब कर देते है।
मुनि श्री ने कहा कि हर कार्य में धैर्य और विवेक रखना चाहिये पहले घर परिवार में यह बात छोटे छोटे बच्चों को घर के बड़े बुजुर्ग घुट्टी में समझाते थे लेकिन आजकल संयुक्त परिवार का अभाव होंने से बच्चे छोटी उम्र से ही उग्र स्वभाव के हो जाते है उनका भावनात्मक संतुलन बिगड़ रहा है,उनकी भावनाओं को कुचलिये मत उनकी भावनाओं को समझीए और समझाइये तभी हम इस समस्या से निजात पा सकते है। यदि आपके अंदर उग्रता है तो आप अपने आपको सामायिक से जोड़िये मुझे सहज रहना है-“मुझे शांत रहना है- मुझे सौम्य रहना है- मुझे धैर्य रखना है” इस प्रकार की भावना से अपने आपको जोड़िये भावनायोग के माध्यम से “में सहज हूं, में शांत हुं में शुद्ध हु, में संयमित हु,के भाव अंदर से 15 मिनट तक महसूस करेंगे तो उग्रता का निवारण हो जाएगा।
इस अवसर पर मुनि श्री संधान सागर महाराज सहित समस्त क्षुल्लक मौजूद थे।उपरोक्त जानकारी देते हुये मुनिसंध के प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन विद्या प्रमाण गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रातः8:30 से पारस चैनल,जिनवाणी चैनल तथा प्रमाणिक एप एवं आदिनाथ चैनल के माध्यम से आप मुनि श्री के प्रवचन को घर बैठकर भी सुनकर अपने जीवन का अमूलचूल परिवर्तन कर सकते है। कार्यक्रम का संचालन ब्र. अशोक भैया लिधोरा ने किया एवं दीप प्रज्जवलन नवरत्न के रुप में श्रीमति सविता एवं पुष्पेन्द्र जैन ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312







