दानवीर ही वीर : सारस्वत सागर जी महाराज

धर्म

दानवीर ही वीर : सारस्वत सागर जी महाराज

नांद्रे (महाराष्ट्र ) : 19-7-2025अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद कोल्हापुर के कार्याध्यक्ष श्री अभिषेक अशोक पाटील, कोल्हापुर ने कहा कि,पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज जी के शिष्य मुनि श्री सारस्वत सागर जी महाराज,मुनि श्री जयंत सागर जी महाराज, मुनि श्री सिद्ध सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्रुतसागर महाराज जी 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, नांद्रे में विराजमान हैं | 

 

 

         विशुद्ध गुरू के छोटे बाबा मुनि श्री 108सारस्वत सागर महाराज जी ने नांद्रे में अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में कई प्रकार कि क्रिया आपको करनी पडती हैं, तब आप कहीं जाकर अपने आप जीवन को जी पाते हो | कहीं पर देना पडता है तो कहीं पर लेना पडता है | लेने – देने कि जो व्यवहार कि क्रिया है यह संबंधो को मजबूत भी करती है तो कई बार संबंधो के विनाश का कारण बन जाती है | जहाँ देना है लेना कुछ नहीं है वहाँ पुरुष अपने में वीरता का अनुभव करता है |

 

 

 

          कहीं – कहीं देखा जाता है कि लोगों के पास बहुत संपत्ती होती है परंतु उनको उस संपत्ती का प्रयोग दुसरे के लिए करने का भाव हो जाता है | 

       जोडते – जोडते मर जाये परंतु किसी कि सहायता नहीं कर पाते, वे पुरुष कभी भी समाज में सम्मान को प्राप्त नहीं होते | सम्मान, यश को प्राप्त करना है तो आपको अपने जीवन से जुडी हुई वस्तुओं का दान देना पडेगा | कहीं पर अपने समय का दान देना पडता है तो कभी कहीं पर धन का दान देना पडता है | दान देने से अहंकार में न्यूनता आती है, पुण्य का अर्जन होता है, पाप का विनाश होता है, जन – जन में पहचान बनती है और मूल कारण है कि हमारी लोभ कषाय में मंदता हो या कषायों कि शून्यता हो तो पुरुष वीर पुरुष कि श्रेणी में आता है | इसलिए दानवीर भी वीर है |

 

 

        

 श्री अभिषेक अशोक पाटील

(कार्याध्यक्ष – अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद,कोल्हापूर) से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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