क्षुल्लक श्री पूर्णतीर्थ सागर महाराज का संलेखना पूर्वक समाधिमरण निकाली गई चकडोल यात्रा
कोटा
आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज के शिष्य क्षुल्लक105 श्री पूर्णतीर्थ सागर महाराज का शनिवार दोपहर की बेला में लगभग 1:10 पर महावीर नगर प्रथम प्रज्ञा लोक में समाधि मरण हो गया उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे।
उनकी अंतिम डोला यात्रा शाम 4:00 निकाली गई जिसमें श्रद्धालु उपस्थित रहे।जैन धर्म में मृत्यु को महोत्सव माना गया है आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज
इस अवसर पर आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने कहा कि जैन धर्म में मृत्यु को महोत्सव माना गया है भगवान महावीर ने जीने के साथ मरने की भी कला सिखाई है। जब साधक अरिहंत का स्मरण करते हुए प्राण त्यागता है तभी उसकी साधना पूर्ण मानी जाती है। क्षुल्लक श्री पूर्णतीर्थ सागर महाराज का जीवन और मृत्यु दोनों ही तप त्याग संयम की प्रेरणादायक मिसाल है क्षुल्लक श्री पूर्णतीर्थ सागर महाराज 20 साल से संघ में तप साधना कर रहे थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
