विचारों में परिवर्तन लाना बहुत जरुरी आचार्य श्री विनिश्चयसागर महाराज
रामगंजमंडी परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चयसागर महाराज के मंगल उद्बोधन शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुए सर्वप्रथम मंगलाचरण आरवीं जैन एवं प्राची बाकलीवाल द्वारा किया गया।
आचार्य श्री ने अपने मंगल प्रवचन में विचारों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि ऐसा कोई जीव नहीं है जो विचार नहीं करता विचार सब करते हैं ऐसा कोई समय नहीं जब कोई विचार उत्पन्न न हो लेकिन विचार कैसा है धार्मिक, अधार्मिक, मर्यादित अमर्यादित हो सकता है। इस पर हमें विचार करना चाहिए कि हम विचार कैसे अच्छा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया है कि हमें बुरे विचार जल्दी आते हैं। इसलिए हमें अच्छे विचार नहीं आते हमें विचारों को बदलना होगा।
महाराज श्री ने कहा कि आप लोगों ने बहुत कुछ बदला मकान बदला सब कुछ बदला लेकिन विचार नहीं बदले अच्छाइयों के विचार नहीं होने से और विचारों को महत्व नहीं देने से यह सब कुछ होता है। महत्व अंतरात्मा में अच्छे परिणाम विचारों का है। सब कुछ मन का विकल्प है शरीर में शक्ति है लेकिन मन में शक्ति नहीं है।

व्यक्ति उपवास कर सकता है लेकिन मन नहीं कर पाता इसलिए वह ताकत नहीं जुटा पाता। धर्म के विषय में कहा कि धर्म वही है जो सुनने लायक है। व्यक्ति अपने आप को जैसा ढालता है वैसा करने लगता है धार्मिकता में ढालते हैं तो धार्मिक अधार्मिकता में ढालते है तो अधार्मिक हे। यह आप पर निर्भर है। व्यक्ति को किसी ना किसी की आदत तो पड़ती है।
धर्म में लगने वाली आदत अच्छी आदत है। क्या मिलेगा जो कुछ आपने धन संग्रह किया उससे क्या मिलेगा चिंतन मनन करना चाहिए। जो अच्छे कर्म हमने किए हैं अच्छे कर्म के अलावा कुछ साथ नहीं जाता। धन वैभव जोड़ने से कुछ नहीं मिलेगा जमीन जायदाद परिवार के लिए हम परिवार से झगड़ा करते हैं हम क्या लेकर जाएंगे धन संग्रह की लिए पूरी आयु दाव लगा देते हैं। धन इकट्ठा तो कर लिया लेकिन आयु नहीं बची धन कमाया स्वास्थ्य खराब कर दिया और और स्वास्थ खराब हुआ तो धन खराब कर दिया।अपनी सोच को बदलो अपने विचारों को बदलो कोई गाली भी दे रहा है तो उस समय विचार को बदलना होगा। अच्छे काम को व्यक्ति कल पर छोड़ देता है और उसकी पूरी आयु निकल जाती है। और हाथ कुछ भी नहीं लगता अच्छाई में लगेगे तो विचार भी अच्छे होंगे। इसका अभ्यास करना होगा। उन्होंने ध्यान के विषय में प्रकाश डाला सुकून पाने की पद्धति हैएकाग्रता यह ध्यान से संभव आज लोग विचारों को बदलने के लिए ध्यान करने लगे हैं और प्राचीन पद्धति पर लौटने लगे हैं।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312




