आचार्य श्री विनिश्चय सागर महाराज के सानिध्य में हुआ बच्चों युवाओं का सेमिनार
रामगंजमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज सानिध्य में दोपहर बेला में छोटे छोटे बच्चों एवम युवाओं को संबोधित किया जिसका निर्देशन मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज ने किया जिसके अंतर्गत बच्चों को शिक्षाप्रद खेल भी खिलाया गया छोटे बच्चे मुनि श्री 108 प्रांजल सागर महाराज के समक्ष आकर महामंत्र नमोकार मंत्र सुनाया और महाराज जी न जब उनसे वार्तालाप कर रहे थे वे दृश्य भाव विभोर कर देने वाले थे। इस बेला में नयांश जैन बाबरिया ने मंगला चरण की प्रस्तुति दी। सर्वप्रथम मुनि श्री 108 प्रत्यक्ष सागर महाराज ने कहा कि आज आप सभी को देखकर बहुत अच्छा लग रहा है, क्योंकि चंद्रगुप्त मौर्य ने सपना देखा था जिसमें देखा था की रथ को दो युवा खींच रहे हैं। इस स्वप्न का फल मुनिराज ने चंद्रगुप्त मौर्य को बताया कि पंचम काल में धर्म का रथ यदि कोई खींचेगा तो युवा ही खींचेंगे इसलिए आज आप सभी बच्चों को मंदिर में देखकर मुझे और आचार्य श्री को बड़ी खुशी हो रही है और यह खुशी हमेशा बनी रहे।
इस अवसर पर आचार्य श्री श्री विनिश्चय सागर महाराज ने कहा की जीवन में हमे हर स्थिति में दूसरे की सहयोग के लिए तैयार रहना चाहिए। हम किसी की भी हेल्प करे तो अहसान मत करना बल्कि मन में आत्म गौरव होना चाहिए।
उपलब्धि कुछ ही समय के लिए होती है लेकिन अनुभव बहुत ज्यादा काम आते हैं। उन्होंने उपलब्धि और अनुभव प्राप्त करने के लिए तीन बातों का विशेष रूप से उल्लेख किया उन्होंने कहा कि लगातार बैठकर पढ़ने का अभ्यास होना चाहिए।
हमें लगन होना चाहिए हम जो भी कार्य करें उसमें लगन होना चाहिए और उसे पूरी लगन के साथ करना चाहिए। और कहा कि कुछ करके दिखाए जीवन में कुछ करके दिखाने की लिए तैयार रहना चाहिए यदि हम ऐसा करते हैं तो हमें अनुभव और उपलब्धि हासिल होगी इसी हमें परीक्षा में नंबर भी अच्छे प्राप्त हो सकते हैं और अनुभव भी प्राप्त होगा।
इस बेला में बच्चों को पुरस्कृत भी किया पुरस्कार मुकेश जैन ओसारा वाले की और से प्रदान किए इसबेला में बच्चों में युवाओ में काफी उत्साह था।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट
