पुण्य से संसार के सारे वैभव प्राप्त होते हैं मुनिश्री प्रज्ञान सागर महाराज
नैनवा जिला बूंदी 24 जून मंगलवार अग्रवाल दिगंबर जैन बड़े मंदिर में धर्म सभा से पूर्व मंगलाचरण की प्रस्तुति बहुत ही छोटी बालिका कक्षा 2 में पढ़ने वाली अयाशी जैन दी।

मुनिश्री ने बताया कि जो भगवान का मंगलाचरण के भाव बनाते हैं वह संस्कारी बच्चे होते हैं त्रिशला जैन द्वारा भी एक भजन की प्रस्तुति दी गईआज मनुष्य को जो कुछ भी प्राप्त हो रहा है यह सब उसके कर्म और पुण्य से प्राप्त हुआ है बिना पुण्य के कुछ भी प्राप्त होना असंभव मुनिश्री ने बताया आज घर पर बीमार होने पर इलाज के लिए डॉक्टर दिखाने पर औषधि लेनी पड़ती है अंग्रेजी दवा जल्दी आराम देती है जबकि आयुर्वेदिक औषधि धीरे-धीरे आराम देती है उत्तम स्वास्थ्य के लिए उन्होंने आयुर्वेदिक औषधि का सेवन अच्छा बताया।
आज संसार के प्राणी को पुण्य से ही धन लक्ष्मी पत्नी अच्छे पुत्र सुंदर शरीर भरा हुआ परिवार यह सब कुछ मिलने का कारण उसका पुण्य ही है बिना पुण्य के उसे यह प्राप्त होने वाले नहीं है
मुनिश्री ने यह भी बताया कि सच्चे मन से ईश्वर का स्मरण करने से ही ईश्वर प्रसन्न होते हैं ना तो उन्हें फल की नहीं पुष्प की नहीं मिठाई किसी भी प्रकार की आवश्यकता भगवान को नहीं होती भक्त तो स्वयं ही उन्हें लेकर भेंट करता है और बदले में मन की इच्छा पूर्ण करने के लिए अभिलाषा करता है


भगवान के दरबार में भिखारी बनकर ना जावे एक सच्चे श्रद्धालु भक्त बनकर जाए यही भगवान और भक्त की सच्ची श्रद्धा है उनसे यही प्रार्थना करें कि मनुष्य पर्याय मुझे मिली मुझसे अच्छे-अच्छे कर्म ही मेरे द्वारा करने के लिए तत्पर करना सच्चे मन से ईश्वर के दर्शन करने से तीन लोक की वस्तुएं प्राप्त होती है सिद्ध चक्र विधान ऐसा चक्र है जो आठो कर्मों को नाश करने वाला चक्र है।


*बचपन में दिए संस्कार सत्य संस्कार है*
जैन मुनि प्रसिद्ध सागर महाराज ने बताया बचपन में पुत्र को माता-पिता दोनों ही सही मार्ग दिखाएंगे तो जीवन भर सही मार्ग पर ही चलेगा छोटे बच्चों को अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं होता गुरु के द्वारा ही उसे जो ज्ञान दिया जाता है वही ज्ञान सबसे प्रमुख ज्ञान माना जाता है
*महावीर कुमार सरावगी वर्षायोग* *प्रचार मंत्री नैनवां*से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
