परिवार के मुखिया की ज़िम्मेदारी है की वह अपनी संतानों को धूम्रपान, शराब, जुआ और मांसाहार से दूर रखे विनम्र सागर महाराज
बागीदौरा
आचार्य विद्यासागर संत भवन में धर्म सभा में मुनिश्री 108 विनम्र सागर महाराज ने कहा कि जब समाज किसी व्यक्ति के बुरे व्यसन को नजर अंदाज करता है तो ऐसे लोगों की संख्या बढ़ती है। धीरे-धीरे यह चलन बन जाता है और समाज से स्वीकार कर लेता है। इससे समाज की मूल पहचान खत्म हो जाती है। इससे समाज की मूल पहचान खत्म हो जाती है। इसी कारण सवर्ण समाज में कई व्यसन आ गए है इससे धर्म और पहचान हमसे दूर हो रही है।
मुनिश्री ने कहा परिवार के मुखिया की जिम्मेदारी है कि वह अपनी संतानों को धूम्रपान, शराब, जुआ और मांसाहार से दूर रखे। तभी संस्कृति सुरक्षित रह सकती है कई बार भीड़ गलत निर्णय को समर्थन कर देती है व्यक्ति उसे सही मान लेता है सही और गलत की पहचान व्यक्ति को अपनी विवेक से करनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो धरोहर दी है उसे जीवंत रखना हमारा कर्तव्य है। जैन धर्म की पहचान तपस्वी और संयमी साधु संतों से है। जैन समाज का जीवन जिस तेजी से बदल रहा है उसे असली पहचान खोती जा रही है।

प्रवचन से पूर्व पाठशाला के बच्चों ने गुरुदेव की पूजन की गीतकार राजेश शाह और सावन मेहता ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इंदौर से आए अभिषेक वास्तु ने दीपप्रज्वलन कर शास्त्र भेट किया। पूजन का संयोजना पाठशाला अध्यक्ष राजेंद्रकुमार दोसी और शिक्षिकाओं ने की। बच्चों के लिए सेठ जयंतीलाल मेहता ने प्रभावना का वितरण किया दोपहर की बेला में मुनि श्री के सानिध्य में धार्मिक कक्षाओं का आयोजन किया संचालन विनोद दोसी ने किया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

