आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज सानिध्य में सात दिवसीय आध्यात्मिक योग शिविर का हुआ शुभारंभ जब तक मन बाहर की चीजों में लगा है उद्धार नहीं होगा आचार्य श्री सुनील सागरजी
डूंगरपुर
परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज ने सोमवार की सुबह 4:45 बजे से सात दिवसीय आध्यात्मिक योग शिविर की शुरुआत की सोमवार को पहले दिन योग प्राणायाम ध्यान और व्यायाम कराया।
धर्म सभा का प्रारंभ मंगलाचरण दीप प्रज्वलन, चित्र अनावरण, से हुई। संयम महिला मंडल द्वारा आचार्य श्री का पूजन भक्ति भाव के साथ किया। गुरुदेव ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जब तक मन गंदा है तब तक मंदिर तीर्थ व गंगा की धार कुछ नहीं कर सकती। उन्होंने प्रश्न करते हुए कहा कि भगवान के मंदिर में आ सकते हैं, पर मन में कब आएंगे? जब तक मन बाहर की चीजों में लगा है उद्धार नहीं होगा।


उन्होंने कहा कि धर्म हमें बंधन से बचाता है। कुछ लोग धर्म के नाम पर झगड़ा करते हैं, क्योंकि उनका मन अशांत होता है। उन्होंने कटाक्ष एवं जोर देते हुए कहा कि धर्म को झगड़े का साधन नहीं बनना चाहिए।
बुद्धू नहीं बना बुद्ध बनने की कोशिश करना चाहिए। एक उदाहरण देते हुए बताया कि कांच पर पारा चढ़ाओ तो आईना बनता है पर किसी को आईना दिखाओ तो पारा चढ़ जाता है। किसी को राह दिखाओ तो गुस्सा आता है। किसी को कुछ मत कहो खुद को जानो।
भगवान की प्रतिमा को देखकर भगवान जैसा बनने का प्रयास करो। पानी को अमृत मानो तो वह रोग मिटा सकता है। प्रभु की मुद्रा देखकर आनंद में रहो। भीतर का ज्ञान खजाना पाने की भावना रखो। धर्म संत और पंथ के विवाद में न पड़ो। खुद को पहचानो आत्म कल्याण करो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
