मध्य भारत का धर्मस्थल – शीतल तीर्थ (रतलाम)स्थापना दिवस के साथ मनाया योगी परिवार का वात्सल्य मिलन
रतलाम, 14 जून। जहाँ श्रद्धा और विश्वास की दृढ़ता हो वंहा अतिशय स्वयं प्रकट हो जाते है और ऐसी ही अतिशय भूमि है मध्यप्रदेश के रतलाम शहर से 13 किमी दूरी पर निर्मित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ परम पूज्य प्रज्ञा पुरुषोत्तम समाधिस्थ आचार्य 108 श्री योगीन्द्र सागर जी महामुनिराज की पावन प्रेरणा से निर्मित एवं चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी एवं आचार्य 108 श्री सुन्दर सागर जी मुनिराज के पावन सानिध्य में प्रतिष्ठित 72 जिनमंदिरो से सुशोभित कैलाश पर्वत की कृत्रिम रचना जो अपने निर्माण के प्रारंभ से ही अतिशय भूमि के रूप में जानी जाती है ।
इस वर्ष भी 14 जून को इस क्षेत्र का स्थापना दिवस भव्यता के साथ मनाया गया ।पूज्य श्रमण मुनि 108 श्री सद्भाव सागर जी (ससंघ), आर्यिका 105 श्री विविक्तश्री माताजी (ससंघ), आर्यिका 105 श्री विशाखाश्री माताजी (ससंघ) के पावन सानिध्य में आयोजित तीर्थ स्थापना दिवस के साथ ही योगी परिवार का वात्सल्य मिलन भी आयोजित किया गया ।


क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ सविता दीदी ने जानकारी देते हुए बताया की प्रतिवर्ष 14 जून को क्षेत्र का स्थापना दिवस एवं 17 फरवरी को पूज्य गुरुदेव योगीन्द्र सागर जी महामुनिराज का जन्मावतरण दिवस भव्यता से मनाया जाता है जिसमें सैकड़ों श्रावक श्राविकाओ सहित कई गुरुभक्त अपनी सहभागिता देते है ।


इस स्थापना दिवस आयोजन के क्रम में प्रातः काल प्रथम बार अतिशयकारी मूलनायक श्री आदिनाथ भगवान चांदखेड़ी वाले बाबा को कृत्रिम कैलाश पर्वत पर पधराकर जल एवं पंचामृत से अभिषेक तदोपरांत शांतिधारा की गई ।


11 फीट उतुंग पद्मासन श्री आदिनाथ भगवान पर जब जल एवं दूध की धारा की गई तो चारों ओर से भगवान के जयकारों से क्षेत्र गुंजायमान हो गया।
इस समय साक्षात अतिशय प्रकट हुआ की वर्तमान में गर्मी का प्रचंड ताप है और प्रातः काल से ही सूर्य में तेजी देखने को मिलती है किंतु इस अभिषेक क्रिया को प्रारंभ करने से लेकर शांतिधारा तक सूर्य ने विनम्रता दिखाई और ठंडी हवाओं के बीच सबने इस भक्ति आनंद में गोते लगाए । जैसे ही अभिषेक क्रिया पूर्ण हुई सूर्य में तेजी आ गई । यह वह अतिशय है जो क्षेत्र पर उपस्थित सभी श्रावको ने देखा और दिन भर इसी विषय की चर्चा भी रही ।
प्रातः 9 बजे गुरु मंदिर में श्री ऋषि विधान का आयोजन हुआ एवं दोपहर में गुरु गुणानुवाद सभा का आयोजन हुआ । जिसमें आमंत्रित विद्वानों में डॉ अनुपम जैन, इंदौर व राकेश जैन ‘चपलमन’, कोटा एवं मुख्य अतिथि के रूप में नगरपालिका निगम बड़नगर चेयरमैन श्री अभय जी टोंग्या, श्री अशोक जी गोधा, श्री पुखराज जी सेठी, डॉ नेमीचंद जैन, श्री महेंद्र जी गुड़वाला श्री संजय बिलाला की उपस्थिति रही ।
इस अवसर पर अपने उद्बोधन में आर्यिका विशाखा श्री माताजी ने कहा की पूज्य गुरुदेव अपनी साधना स्व हित के लिए करते थे किंतु उसी साधना के प्रताप से आने वाले श्रावको के दुखो को भी दूर करते थे । इसकी में स्वयं प्रत्यक्ष प्रमाण हूं क्योंकि मुझे गुरुदेव के उन्ही चमत्कारो को देखने का सौभाग्य मिला ।
आर्यिका विविक्तश्री माताजी ने कहा की हमने आचार्य योगीन्द्र सागर जी के कभी दर्शन नहीं किए किंतु गुरु मुख से इनकी तपस्या और साधना की प्रभावना को जरूर सुना है जब उस वर्णन को सुनना ही मन को आनंद से भर देता है तो ऐसे गुरुओं के प्रत्यक्ष दर्शन किसी तीर्थ दर्शन से कम नहीं होंगे ।
मुनि श्री सद्भाव सागर जी ने कहा की अब तक मेने इस क्षेत्र के अतिशय के बारे में सुना था किंतु अब उस अतिशय को महसूस भी कर लिया है क्योंकि जब में यहां आया तो रुग्णावस्था में था और जैसे ही इस भूमि के संपर्क में आया स्वयं को स्वस्थ एवं आनंदित महसूस कर रहा हूं। यह शीतल तीर्थ की भूमि उर्जा और अतिशय से भरपूर है ।
इसी अवसर पर डॉ सविता दीदी ने क्षेत्र की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उपस्थिति श्रमण संघ को क्षेत्र पर ही प्रवास का निवेदन किया एवं आगंतुक सभी गुरुभक्तो का आभार प्रकट किया।
राकेश जैन ‘चपलमन’9829097464 से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
