डॉ. प्रगति जैन करेंगी लंदन में भारत और जैन दर्शन की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्वअनेकांतवाद और स्याद्वाद से संवरेगा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य।           

धर्म

डॉ. प्रगति जैन करेंगी लंदन में भारत और जैन दर्शन की गौरवशाली परंपरा का प्रतिनिधित्वअनेकांतवाद और स्याद्वाद से संवरेगा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का भविष्य।                                                       इंदौर 

इंदौर की ख्यातिप्राप्त शिक्षाविद्, गणितज्ञ, प्रेरणादायिनी वक्ता और लेखिका डॉ. प्रगति जैन आगामी 6-7 जून को लंदन मेट्रोपोलिटन यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “Frontiers of Intelligent Computing: Theory and Applications” में भारत का ही नहीं, बल्कि भगवान महावीर के अनेकांतमयी दर्शन का भी प्रतिनिधित्व करेंगी।

 

 

वे “Explainable Artificial Intelligence through Syadvada Logic” विषय पर शोधपत्र प्रस्तुत करेंगी, जिसमें स्याद्वाद जैसे जैन तर्कशास्त्र के सिद्धांतों के माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को अधिक मानवीय, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक अभिनव दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। यह शोध Springer Publication जैसे विश्वविख्यात प्रकाशन में प्रकाशित किया जाएगा।

       

डॉ. जैन का यह शोध भारतीय ज्ञान परंपरा, विशेषकर जैन दर्शन की वैज्ञानिकता और तर्कसंगत सोच को वैश्विक मंच पर सामने लाने का एक सशक्त प्रयास है। उनका प्रस्तावित मॉडल यह दर्शाता है कि भगवान महावीर द्वारा प्रतिपादित अनेकांतवाद और स्याद्वाद आज के जटिल तकनीकी प्रश्नों का भी संतुलित और विवेकपूर्ण समाधान दे सकते हैं।

 

डॉ. प्रगति जैन की उपलब्धियाँ समाज के लिए गर्व का विषय हैं। वे मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा चयनित प्राध्यापक हैं, और अब तक 50 से अधिक शोधपत्र, 9 पुस्तकें, तथा 3 पेटेंट उनके नाम दर्ज हैं। उनकी पुस्तक ‘The Power of Pause: From Reaction to Response’ अमेज़न की बेस्टसेलर रही है। उनके निर्देशन में अब तक तीन शोधार्थी पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं।

उन्होंने कुआलालंपुर, मलेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों से अनेक सम्मान प्राप्त किए। उनकी ओजस्वी वाणी, लेखनी और चिंतन ने शिक्षा, समाज और साधना—तीनों क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। वह जैन पत्रकार महासंघ की राष्ट्रीय मंत्री भी हैं ।

 

अपने शोध के उद्देश्य पर डॉ. जैन कहती हैं:
“जैन दर्शन केवल मोक्षमार्ग नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण जीवन और विज्ञान के लिए भी मार्गदर्शक है। स्याद्वाद हमें सिखाता है कि हर पक्ष में कुछ सत्य होता है, और यही दृष्टिकोण जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता में आएगा, तो तकनीक अधिक करुणामयी और संतुलित बन सकेगी।”

    संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *