रोग और आग को कभी छोटा ना समझें.. अन्यथा अनर्थ होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
दिल्ली
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि आज हर व्यक्ति रोग और मौत से भयभीत होकर जीवन जी रहा है। फिर वो बीमारी अपनी हो, या अपने परिजनों की हो या मित्रो की हो — स्वास्थ्य को लेकर सब चिन्तित और परेशान है। हम जितना बचें बीमारियों से, उतना ही बेहतर है। उन्होंने कहा रोग और आग को कभी छोटा ना समझें.. अन्यथा अनर्थ होने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा..!

हमेशा सावधान रहें अपनी लापरवाही और स्वयं की बेपरवाह से, क्योंकि –बीमार होना सरल है पर ठीक होना बहुत कठिन है। मरना सरल है लेकिन मर मर कर जीना या बीमार होकर जीना बहुत कठिन है।हम जानते हैं — इस दुनिया में ऐसा कोई भी नहीं है, जो पूर्णतया रोगों से मुक्त हो, बीमार होने की अनेकानेक वजह हो सकती है। बीमारियां छोटी बड़ी नहीं होती है, बीमारी तो बीमारी होती है। यदि हम बीमार पड़ते हैं तो फिर वो कोई भी बीमारी हो, सबसे पहले हम उसे स्वीकार करें और उपचार की बुनियादों से अपनी वर्तमान स्थिति को संभाले,, क्योंकि मानव शरीर अति संवेदनशील है।इस पर हर तरह की बातों का असर होता है। अगर हमारे शरीर के साथ कुछ गलत होता है, तो यह रोग दो गुना और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है।


उन्होंने कहा ध्यान रखें — कभी भी अपनी बीमारी को सबसे शेयर ना करें, उनसे शेयर करें जिनके पास आपकी बीमारी का इलाज हो, समाधान हो। अन्यथ: लोग सामने दुःख जतायेंगे और आपकी पीठ पीछे लड्डू खिलायेंगे…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


