समता शिरोमणि वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव का वर्षायोग हेतु मंगल प्रवेश पराडा ईटीवार मे हुआ l

धर्म

समता शिरोमणि वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव का वर्षायोग हेतु मंगल प्रवेश पराडा ईटीवार मे हुआ l

पराडा ईटीवार

समता शिरोमणि वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नदी गुरुदेव का वर्षायोग हेतु मंगल प्रवेश पराडा ईटीवार मे हुआ lगुरुदेव ने अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार मैं बताया कि उपसर्ग दूर करना भी वैयावृति है l जिसके मन में वात्सल्य है वही वैयावृत्ति कर सकता है l भक्ति करने से सुंदर रूप, स्तवन करने से कीर्ति फैलती है l दान भी वैयावृति है l

 

 

जिनवाणी रूपी समुद्र से अमृत मंथन करके गुरुदेव हमें ज्ञानार्जुन करा रहे हैं l जो त्याग करता है वह ऊपर रहता है जैसे बादल ऊपर रहते है उनका जल भी मीठा होता है l समुद्र ग्रहण करता है इसलिए नीचे रहता है उसका पानी भी खारा होता है l खारा पानी पीने से व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है l आहार दान देते समय दाता का हाथ ऊपर रहता है खाली ग्लास को भरना हो तो भरा हुआ ग्लास ऊपर रखेंगे तथा खाली ग्लास नीचे रखेंगे तभी खाली ग्लास भर सकेगा जो आहर दान नहीं देता है सातंवना नहीं देता है उसको आचार्य श्री निंदा करते हुए कहते हैं कि वह कुधर्मी, धर्म भ्रष्ट, निर्धन, पापी है l शारीरिक आर्थिक समर्थ्यता होने पर भी दान नहीं देना पाप है l जो आहार दान देने में असमर्थ है रोगी पशु पक्षी बच्चे वृद्दद उन्हें

 

अनुमोदना करके पुण्य कमाना चाहिए l चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में एक साधु को कभी भी आहार नहीं मिला भगवान के समवशरण में भगवान से पूछने पर ज्ञात हुआ कि वह साधु पहले राजा थे उस

 

समय उन्होंने आर्डर किया था कि काम करने वाली महिलाएं अपने कार्य करते हुए बच्चों को दूध नहीं पिला सकती हैं इसलिए उन्हें आहार नहीं मिला l मुनि श्री सुविज्ञसागर जी ने नील गगन के तले सर्वत्र शांति फैले, मानव हो या प्रकृति हो सदा ही शांति पाले कविता द्वारा मंगलाचरण किया संकलन कर्ता विजयलक्ष्मी

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